तीसरा सोआ साहित्य महोत्सव शनिवार को शुरू हुआ, जहां ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरी बाबू कम्भमपति ने कहा कि तकनीक लगातार मानव संबंधों को बदल रही है, लेकिन वह मानवीय अनुभव की गहराई को कभी प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। उद्घाटन समारोह में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचार, रचनात्मकता और मानव संबंधों को बदल रहा है, लेकिन AI से प्रभावित भविष्य भी मानवीय सहानुभूति, नैतिक निर्णय और भविष्य की कल्पना करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।”
समारोह में देश के प्रख्यात कवि, लेखक, पटकथा लेखक और चिंतक जावेद अख्तर ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्हें प्रथम सोआ साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया।
पुरस्कार में एक प्रशस्ति पत्र, एक शॉल, देवी सरस्वती की चांदी की प्रतिमा और सात लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल है। यह पुरस्कार इस वर्ष से शुरू किया गया है और उन वरिष्ठ साहित्यकारों को दिया जाएगा जिनकी कृतियां उत्कृष्टता, रचनात्मकता और बौद्धिक गहराई को दर्शाती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सोआ के कुलपति प्रो. प्रदीप्त कुमार नंद ने की। साहित्य अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. के. श्रीनिवासराव और सोआ की उपाध्यक्ष सास्वती दास सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। PPRACHIN की प्रमुख और फेस्टिवल की निदेशक प्रो. (डॉ.) गायत्रीबाला पंडा ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) और मुख्य समन्वयक प्रो. ज्योति रंजन दास ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
राज्यपाल डॉ. कम्भमपति ने जावेद अख्तर को बधाई देते हुए कहा कि एक कवि, गीतकार और पटकथा लेखक के रूप में उनका पांच दशक से अधिक का योगदान भारत की सांस्कृतिक चेतना को आकार देता आया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान अपने पहले ही वर्ष में प्रतिष्ठा हासिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि जो समाज पढ़ता है, वह सोचता है, और जो सोचता है, वही प्रगति करता है।
सम्मान स्वीकार करते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि वह इस आदर से अभिभूत हैं। ऐसे विश्वविद्यालय में आना अपने आप में एक बड़ा अवसर और सम्मान है। उन्होंने भाषा, संस्कृति, पौराणिक कथाओं और कला को अमूल्य संसाधन बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के समय भारत एक सुई तक नहीं बना सकता था, जबकि आज वह दुनिया के सबसे औद्योगिक देशों में एक है। लेकिन भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में हमने अपनी कुछ सांस्कृतिक थाती पीछे छोड़ दी है और संस्कृति उन्हीं में से एक है।
कार्यक्रम में प्रो. गायत्रीबाला पंडा की पुस्तक ‘Dayanadi’ के अंग्रेज़ी अनुवाद ‘River Daya’ सहित, सरोलदास महाभारत के दो सभा पर्व और मध्य पर्व, PPRACHIN द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। बाद में अख्तर का साक्षात्कार अभिनेत्री और निर्माता वाणी त्रिपाठी टिक्कू ने किया। इस दौरान अख्तर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा करते हुए कहा कि तकनीक में नैतिकता नहीं होती—यह मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह इसका उपयोग कैसे करता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा का उपयोग अच्छे और बुरे, दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इतिहास देखें तो लोग हर खोज से डरते थे यहां तक कि भाप इंजन को भी कभी शैतान का वाहन कहा गया।
AI की सीमाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह अभी भी डेटा पर निर्भर है और रचनात्मक नहीं है। उन्होंने कहा कि भविष्य में क्या होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन फिलहाल मानव रचनात्मकता को कोई चुनौती नहीं है।