ओडिशा में सक्रिय माओवादी समूहों को कड़ा संदेश देते हुए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने शनिवार को चेतावनी दी है कि जो माओवादी समर्पण नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मुठभेड़ की संभावना भी शामिल है।
भुवनेश्वर में प्रेस वार्ता के दौरान बीएसएफ के इंस्पेक्टर जनरल शिव आधार श्रीवास्तव ने कहा कि मार्च 2026 तक ओडिशा को पूरी तरह नक्सल-मुक्त बनाना बल का प्रमुख लक्ष्य है।
श्रीवास्तव ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार और सुरक्षा बल उन सभी माओवादियों की सहायता के लिए तैयार हैं जो मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। यदि वे समर्पण करते हैं, तो उन्हें पूरा सहयोग दिया जाएगा और वे सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।
उन्होंने हथियार छोड़ने के लिए माओवादी कैडरों को प्रेरित करते हुए बताया कि राज्य में समर्पण करने वालों के लिए पुनर्वास की स्पष्ट योजनाएं मौजूद हैं।
हाल में हुई बड़ी कार्रवाई का उल्लेख करते हुए आईजी ने कहा कि कुख्यात माओवादी नेता हिडमा के मारे जाने के बाद अब सुरक्षा बलों का फोकस ओडिशा और सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय अन्य शीर्ष माओवादी नेताओं पर है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 राज्य की एंटी-माओवादी कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण रहा है—सुरक्षा अभियानों के दौरान 19 माओवादी मारे गए, 8 गिरफ्तार हुए और 6 ने समर्पण किया।
बीएसएफ आईजी ने दोहराया कि शांति से समर्पण करने का अवसर अब भी खुला है, लेकिन जो हिंसा का रास्ता चुनेंगे, उन्हें कड़े और निर्णायक कदमों का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में माओवादी प्रभाव को पूरी तरह खत्म कर शांति बहाल करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।