117 करोड़ की लागत से कोलकाता का 'फोल्डिंग' ब्रिज बनेगा अत्याधुनिक

  • Feb 20, 2026
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कोलकाता,20 फरवरीः

कोलकाता की ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर हावड़ा ब्रिज जैसे इंजीनियरिंग के शानदार नमूनों, विक्टोरिया मेमोरियल की अद्भूत संरचना और साइंस सिटी के हैरान करने वाले वैज्ञानिक प्रयोगो तक के बारे में अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी संरचना भी मौजूद है जो संभवतः कोलकाता को लीक से हटाकर खड़ा करता है। कुछ समय पहले जब दक्षिण भारत में तमिलनाडु की मुख्य भूमि को रामेश्वर द्वीप से जोड़ने वाले नए पंबन ब्रिज का उद्घाटन किया गया, तब इसकी सबसे बड़ी खासियतों में यह भी कहा गया था कि आवश्यकता होने पर इस ब्रिज को बीच से ही मोड़ा जा सकता है। लेकिन अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि इस तरह की शानदार इंजीनियरिंग का नमूना कोलकाता में पहले से ही मौजूद है। हम बात कर रहे हुगली नदी के पूर्वी तट पर मौजूद बास्क्यूल ब्रिज (Bascule Bridge) की। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस ब्रिज का निर्माण 1966 में किया गया था। यह आज भी महानगर में अपनी तरह का एकलौता ब्रिज है। पर आज अचानक हम इस ब्रिज के बारे में क्यों बात कर रहे हैं? दरअसल, हाल ही में इस ब्रिज की देखरेख की जिम्मेदारी संभालने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता (SMPK) ने 117.54 करोड़ की लागत से बास्क्यूल ब्रिज के आधुनिकीकरण परियोजना की घोषणा की है।

बास्क्यूल ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत इसका बीच में से खुल जाना है। जब भी कार्गो जहाज आते हैं, इस ब्रिज को बीच में से खोल दिया जाता है और ब्रिज ऊपर की ओर उठ जाता है। नीचे से कार्गो जहाज के गुजर जाने के बाद ब्रिज को धीरे-धीरे फिर सामान्य परिस्थिति में ला दिया जाता है, जिसके बाद यातायात फिर से सामान्य हो जाती है। एक प्रकार से कहा जा सकता है कि यह ब्रिज ठीक उसी तरह से कोलकाता की लाइफलाइन है, जैसे हावड़ा और द्वितीय हुगली सेतु हुआ करते हैं। वर्तमान में यह ब्रिज गार्डनरिच और मेटियाब्रुज को जोड़ने का काम करता है। बताया जाता है कि करीब 1,640 टन स्टील से इस ब्रिज का निर्माण किया गया था।

 मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और विशेषज्ञ इंजीनियरों के साथ मिलकर इस ब्रिज के आधुनीकिकरण की व्यवस्था की जा रही है। इस बारे में मीडिया से बात करते हुए SMPK के चेयरपर्सन रथींद्र रमन ने बताया कि हम सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण कर रहे हैं बल्कि पोर्ट तक आवाजाही की गति को बढ़ाने और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का काम भी कर रहे हैं। बताया जाता है कि इस ब्रिज के मेकओवर में इलेक्ट्रो-मेकैनिकल सिस्टम की मरम्मत की जाएगी।

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