ओडिशा विधानसभा को अनिश्चितकाल (साइन डाई) के लिए स्थगित कर दिया गया, जिसके साथ ही चल रहा बजट सत्र निर्धारित समय से पांच कार्यदिवस पहले समाप्त हो गया।
17वीं ओडिशा विधानसभा का छठा सत्र 17 फरवरी से शुरू हुआ था और इसे 8 अप्रैल तक चलना था। दो चरणों में आयोजित इस सत्र के लिए कुल 28 कार्यदिवस निर्धारित किए गए थे। हालांकि, सदन की कार्यवाही मंगलवार देर रात 22 कार्यदिवस पूरे होने के बाद समाप्त कर दी गई।
सत्र के दौरान विपक्षी नेताओं द्वारा लाए गए पांच स्थगन प्रस्तावों पर सदन में चर्चा हुई। इस अवधि में दो सरकारी विधेयक पारित किए गए। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, पिछले सत्र में पारित वेतन एवं भत्तों में वृद्धि से जुड़े विवादित विधेयक को भी मंगलवार को औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया।
सत्र के अंतिम दिन सदन ने विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) पारित किया, जिससे सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की समेकित निधि (Consolidated Fund) से 3.10 लाख करोड़ रुपये निकालने और खर्च करने की अनुमति मिल गई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, जो वित्त विभाग भी संभालते हैं, ने 20 फरवरी को सत्र के पहले चरण में 2026-27 का 3.10 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया था।
हंगामे के बीच चला बजट सत्र
बजट सत्र के दौरान विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) और कांग्रेस के विधायकों ने 16 मार्च को कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुई भीषण आग की घटना को लेकर लगातार हंगामा किया। इस हादसे में 12 मरीजों की मौत हो गई थी।
इसके अलावा भाजपा के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर कथित “अपमानजनक टिप्पणी” को लेकर भी बीजेडी और कांग्रेस विधायकों ने सदन में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राज्य में धान खरीद में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी विपक्ष ने उठाया। विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के विरोध और प्रदर्शन के कारण कई दिनों तक सदन की कार्यवाही बाधित रही।
बीजेडी और कांग्रेस ने एससीबी मेडिकल कॉलेज अग्निकांड को लेकर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग भी लगातार जारी रखी।