वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए 11 हार्डकोर माओवादियों ने रविवार को कलाहांडी जिले के भवानीपटना स्थित रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ओडिशा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
इन माओवादी कैडरों ने ओडिशा के पुलिस महानिदेशक योगेश बहादुर खुरानिया के समक्ष हथियार डाल दिए। इस दौरान कई वरिष्ठ पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अधिकारी मौजूद थे, जिनमें ADG (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजय पांडा, IG CRPF अमितेंद्र नाथ सिन्हा, IG ऑपरेशंस डॉ. दीपक कुमार, DIG SIW अखिलेश्वर सिंह, DIG कोरापुट विशाल सिंह, कालाहांडी एसपी नगराज देवरकोंडा, रायगढ़ा एसपी स्वाति एस. कुमार और कंधमाल एसपी हरीशा बी.सी. शामिल थे। आत्मसमर्पण कर उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
आत्मसमर्पण करने वालों में नकुल भी शामिल है, जो CPI (माओवादी) की ओडिशा स्टेट कमेटी का डिविजनल कमेटी सदस्य था और उसके सिर पर 22 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वाले समूह में एक डिविजनल कमेटी सदस्य, पांच एरिया कमेटी सदस्य और पांच पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन सभी पर कुल मिलाकर 63.25 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए DGP खुरानिया ने कहा कि यह आत्मसमर्पण क्षेत्र में माओवादी विचारधारा के लगातार कमजोर पड़ने का संकेत है। उन्होंने इसका श्रेय सुरक्षा बलों की लगातार एंटी-नक्सल कार्रवाइयों को दिया, जिनमें स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG), डिस्ट्रिक्ट वॉलंटरी फोर्स (DVF), CRPF और BSF शामिल हैं।
उन्होंने आश्वासन दिया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को राज्य सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के तहत वित्तीय सहायता और कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकें।
एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजीव पंडा ने कहा कि यह आत्मसमर्पण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह समूह कलाहांडी, रायगढ़ा और कंधमाल जिलों में BGN डिवीजन के तहत सक्रिय था। नकुल महाराष्ट्र का रहने वाला है, जबकि बाकी दस माओवादी पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के निवासी हैं।
पुलिस ने बताया कि दिसंबर 2025 में कंधमाल में माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य गणेश उइके के मारे जाने और क्षेत्र में लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के कारण ये कैडर हतोत्साहित हो गए थे, जिसके चलते उन्होंने आत्मसमर्पण करने का फैसला लिया।
माओवादियों ने पुलिस को 11 हथियार सौंपे, जिनमें एक AK-47 राइफल, एक INSAS राइफल, चार SLR राइफल, चार सिंगल-शॉट राइफल और एक 12-बोर बंदूक शामिल हैं। इसके साथ बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य सामग्री भी बरामद की गई है। हथियारों के लिए उन्हें अलग से मुआवजा भी दिया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले इस समूह को पुनर्वास नीति और हथियारों के मुआवजे सहित कुल मिलाकर करीब 1.23 करोड़ रुपये का पैकेज मिलेगा।
पुलिस के अनुसार, अब ओडिशा में सक्रिय सशस्त्र माओवादी कैडरों की संख्या घटकर लगभग 15 रह गई है और उनकी गतिविधियां मुख्य रूप से कंधमाल जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित हैं।
अब तक नुआपड़ा, नवरंगपुर, मलकानगिरी, कोरापुट, बौध और बलांगीर जैसे जिलों को पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है।
ओडिशा पुलिस ने दोहराया कि राज्य को 31 मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद से पूरी तरह मुक्त बनाने के लिए अभियान जारी रहेगा।