जिले में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। लक्ष्मी भंडार जैसी सामाजिक योजनाओं को नाकाफी बताते हुए सैकड़ों अल्पसंख्यक महिलाएं तृणमूल छोड़कर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) में शामिल हो गईं। मिली जानकारी के अनुसार, रतुआ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत परानपुर इलाके के मिर्ज़ातपुर मदरसापाड़ा में यहां रतुआ-1 ब्लॉक के एआईएमआईएम अध्यक्ष शेख जहांगिर के नेतृत्व में एक सभा आयोजित हुई, जिसमें करीब 500 परिवारों ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एआईएमआईएम का दामन थाम लिया। एआईएमआईएम में शामिल हुईं सबेरा बीबी ने कहा कि मेरे बेटे-बेटियां सब बाहर मजदूरी कर रहे हैं। मैं चाहती हूं कि वे यहीं काम करें, लेकिन यहां कोई रोजगार नहीं है। लक्ष्मी भंडार के पैसों से घर नहीं चलता। मेरे पति भी बाहर काम करते हैं।
बाहर जाकर मारे जाने की खबरें सुनते हैं, लेकिन पेट की मजबूरी ने उन्हें वहां भेजा। इसलिए हमें लक्ष्मी भंडार नहीं चाहिए, हमें काम चाहिए। महिलाओं का आरोप है कि राज्य में रोजगार के अवसर नहीं हैं, शिक्षा व्यवस्था बदहाल है और बच्चों को सही पढ़ाई देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए कोई मजबूत ढांचा नहीं है।
इसी असंतोष के चलते उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ लिया। उल्लेखनीय है कि मालदह और मुर्शिदाबाद जिलों में एआईएमआईएम लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रही है। इससे पहले भी रतुआ, मानिकचक और मालतीपुर जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मतदाता तृणमूल छोड़कर एआईएमआईएम में शामिल हो चुके हैं।