बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ओडिशा के सभी सांसदों को एक कड़ा पत्र लिखकर प्रस्तावित 131वें संविधान संशोधन विधेयक को राज्य के दीर्घकालिक राजनीतिक और आर्थिक हितों के लिए गंभीर खतरा बताया है।
अपने पत्र में पटनायक ने ओड़िया नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह केवल बीजेडी अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि एक चिंतित ओड़िया के तौर पर लिख रहे हैं, जो राज्य की गरिमा और समान प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेडी महिला सशक्तिकरण और विधायी निकायों में महिलाओं की अधिक भागीदारी का पूरी तरह समर्थन करती है। उन्होंने अपने पिता दिवंगत बीजू पटनायक की पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं के आरक्षण की पहल को याद करते हुए कहा कि उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए बीजेडी ने 2023 में 106वें संविधान संशोधन विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का समर्थन किया था। हालांकि, उन्होंने 131वें संविधान संशोधन विधेयक के वर्तमान स्वरूप पर गंभीर चिंता जताई।
पटनायक ने कहा कि भारतीय संघवाद की मूल भावना संतुलित प्रतिनिधित्व में निहित है और किसी भी परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रक्रिया में यह संतुलन बिगड़ने का खतरा है, जिससे ओडिशा जैसे राज्यों को राष्ट्रीय निर्णयों में हाशिए पर धकेला जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इस विधेयक के लागू होने पर लोकसभा में ओडिशा की हिस्सेदारी 3.9% से घटकर 3.4% हो जाएगी, जिससे राज्य शीर्ष छह नुकसान झेलने वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इससे आपदा प्रबंधन, जनजातीय कल्याण और क्षेत्रीय विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ओडिशा की आवाज कमजोर पड़ जाएगी। पटनायक ने इस मुद्दे के भावनात्मक और सांस्कृतिक पहलुओं पर भी जोर देते हुए कहा कि संसद में प्रतिनिधित्व केवल संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य की पहचान, गर्व और उसकी विशिष्ट भाषा, इतिहास और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति से जुड़ा है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय विमर्श में ओडिशा की उपस्थिति कम होने से लोगों में उपेक्षा की भावना पैदा हो सकती है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “ओडिशा के लोगों के लिए संसद में प्रतिनिधित्व केवल संख्या नहीं, बल्कि पहचान, गर्व और यह भरोसा है कि हमारी विशिष्ट भाषा, इतिहास और आकांक्षाएं सर्वोच्च स्तर पर सुनी जाती हैं। किसी भी प्रकार की कमी लोगों में हीनभावना पैदा कर सकती है।
आर्थिक पहलुओं पर पटनायक ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ना, जो अगली जनगणना के बाद होगी, दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में प्रगति करने वाले राज्यों, जैसे ओडिशा, को इसका अनुचित नुकसान होगा। अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अधिक सीटें मिलने से केंद्र के संसाधनों, वित्तीय हस्तांतरण और बुनियादी ढांचे के निवेश के वितरण में असंतुलन आ सकता है।
इन सभी चिंताओं के मद्देनजर पटनायक ने सभी ओडिशा सांसदों से, पार्टी से ऊपर उठकर, इस विधेयक के व्यापक प्रभावों का गहन अध्ययन करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं और जरूरत पड़ने पर महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से अलग किया जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विधेयक का समर्थन तभी किया जाना चाहिए जब ओडिशा के प्रतिनिधित्व में किसी भी प्रकार की कमी या समझौता न हो। पटनायक ने यह भी चेतावनी दी कि यदि राज्य की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया तो बीजेडी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने के लिए तैयार है।