ऋषिकुल्या तट पर इस वर्ष ऑलिव रिडले समुद्री कछुओं के सामूहिक अंडे देने (मास नेस्टिंग) में तेज गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2026 में केवल 2.05 लाख कछुओं ने यहां अंडे दिए, जो 2025 में दर्ज लगभग 9 लाख कछुओं के अब तक के रिकॉर्ड आंकड़े की तुलना में काफी कम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई प्राकृतिक कारणों ने इन संकटग्रस्त प्रजातियों के आगमन में देरी और संख्या में कमी पर बड़ा प्रभाव डाला। इनमें समुद्र तट की चौड़ाई का कम होना, मुहाना क्षेत्र में मिट्टी का कटाव, समुद्र की सतह के तापमान में अचानक वृद्धि तथा दक्षिणी हवाओं की अनुपस्थिति शामिल हैं।
सहायक वन संरक्षक दिव्य रंजन बेहरा ने बताया कि इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव ने कछुओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया। पिछले वर्ष पदमपेटा क्षेत्र में बड़ी संख्या में अंडे सुरक्षित रहे थे और उस समय समुद्री कछुओं का विशाल जमावड़ा देखने को मिला था। हालांकि, इस वर्ष परिस्थितियों में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पर्यावरणविदों और शोधकर्ताओं ने समुद्र तट की मिट्टी में व्यापक कटाव दर्ज किया, जिससे तट की चौड़ाई और कम हो गई।
यह कटाव प्रयागी तक विस्तृत क्षेत्र में देखा गया, जिसके कारण कछुओं ने इस बार अलग-अलग स्थानों पर बिखरे रूप में अंडे देना शुरू किया। वर्ष की शुरुआत में उन्होंने द्वीप क्षेत्र के समुद्र तट पर नेस्टिंग शुरू की, लेकिन धीरे-धीरे सामूहिक नेस्टिंग का क्षेत्र ऋषिकुल्या मुहाने की ओर खिसक गया।
अधिकारियों के अनुसार, सामान्यतः उपयोग किए जाने वाले विस्तृत रेतीले तट को नेस्टिंग सीजन शुरू होने से ठीक पहले समुद्री परिस्थितियों ने नष्ट कर दिया था। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में यहां सामूहिक नेस्टिंग शून्य रही थी और 2024 में भी संख्या कम रही। इसके विपरीत, 2025 में लगभग 10 दिनों तक कछुओं का रिकॉर्ड स्तर पर आगमन दर्ज किया गया था।