ओडिशा में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। 55 लाख रुपये के इनामी वांछित माओवादी नेता सुकरू उर्फ कोशा सोढ़ी ने कंधमाल पुलिस के सामने अपने चार साथियों और एक एके-47 राइफल के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है।
एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशंस) संजीव पंडा ने पुष्टि की है कि सभी पांच माओवादी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। उनके आत्मसमर्पण की औपचारिक घोषणा कल एक सार्वजनिक कार्यक्रम में की जाएगी।
49 वर्षीय सुकरू, जो मलकानगिरी जिले का निवासी है और प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का राज्य समिति सदस्य था, ओडिशा में सक्रिय सबसे वरिष्ठ माओवादी माना जाता था। वह लगभग 13 उग्रवादियों के एक छोटे दल का नेतृत्व कर रहा था, जिनमें अधिकांश छत्तीसगढ़ से थे और जो मुख्य रूप से कंधमाल जिले में सक्रिय थे।
पुलिस के अनुसार, सुकरू आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में बड़ी बाधा बना हुआ था। इस वर्ष जनवरी में उसने कथित रूप से अपने जूनियर अन्वेष की हत्या कर दी थी, जो डिवीजनल कमेटी सदस्य और सैन्य प्लाटून कमांडर था तथा हथियार छोड़ना चाहता था। अन्वेष के शव को शिला और जोगेश सहित साथियों की मदद से जंगल में दफना दिया गया था।
बाद में 22 फरवरी को सुरक्षा बलों ने जोगेश को मुठभेड़ में मार गिराया। सूत्रों के मुताबिक लगातार पुलिस अभियानों, ड्रोन निगरानी और परिवार के दबाव के कारण अंततः सुकरू ने आत्मसमर्पण का फैसला लिया, हालांकि उसके कुछ साथी इसके खिलाफ थे।
डीजीपी वाईबी खुरानिया ने पहले बताया था कि सुरक्षा बलों को कंधमाल, रायगड़ा और कलाहांडी के घने त्रि-जंक्शन जंगलों में सुकरू के ठिकाने की सटीक जानकारी थी और वहां लगातार अभियान चलाए जा रहे थे।
हाल के आत्मसमर्पण—11 मार्च को सानु पोट्टम के नेतृत्व में 10 माओवादी और 15 मार्च को नकुल के नेतृत्व में 11 अन्य माओवादियों के सरेंडर—के बाद राज्य 31 मार्च तक माओवादी-मुक्त बनने के अपने लक्ष्य के काफी करीब पहुंच गया है।
अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि सुकरू के आत्मसमर्पण से शेष माओवादी कैडर भी राज्य की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित होंगे।