पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 152 सीटों पर हाई-वोल्टेज प्रचार अभियान मंगलवार शाम छह बजे समाप्त हो गया। इस चरण के लिए मतदान कल यानी 23 अप्रैल को होना है। पहले चरण के प्रचार के दौरान एसआईआर प्रमुख मुद्दा रहा, जिस पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। दोनों ही दलों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए बड़े-बड़े वादे भी किए।
उत्तर और दक्षिण बंगाल के कई जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होगा। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, इस चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं। इनमें करीब 1.84 करोड़ पुरुष, 1.75 करोड़ महिला और 465 थर्ड जेंडर के मतदाता शामिल हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की रिकॉर्ड 2,450 कंपनियां तैनात की हैं। यानी करीब 2.5 लाख सुरक्षाकर्मी। आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करते हुए 8,000 से अधिक मतदान केंद्रों को अत्यधिक संवेदनशील घोषित किया है। मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, कूचबिहार, बीरभूम और बर्दवान जैसे जिलों को विशेष रूप से संवेदनशील माना गया है और इन इलाकों की सभी सीटों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के अलावा सर्विलांस टीमें और 2,193 क्विक रिस्पॉन्स टीमें भी तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी घटना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से बेदखल करने के प्रयास में है।