मधुसूदन लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति का पद संभालने के एक दिन बाद प्रो. सिबराम त्रिपाठी ने ओडिशा में विधि शिक्षा को बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया। इसमें शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक सुधार और छात्रों की रोजगार क्षमता पर विशेष जोर दिया गया है।
विश्वविद्यालय परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए त्रिपाठी ने प्रेस को “समाज का प्रहरी” बताया और राज्य की विधि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अधीन 30 से अधिक संबद्ध लॉ कॉलेज हैं, जिससे आगे की जिम्मेदारी काफी व्यापक और महत्वपूर्ण है।
शैक्षणिक सुधार को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कुलपति ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए नियमित शिक्षकों की भर्ती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2021 में विश्वविद्यालय बनने के बाद से संस्थान मुख्य रूप से अतिथि शिक्षकों पर निर्भर रहा है और लगभग पांच वर्षों से स्थायी फैकल्टी की कमी है। इन पदों को भरना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।
प्रशासनिक सुधारों के तहत उन्होंने सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम लागू करने की घोषणा की, जिससे छात्रों की सेवाओं को आसान बनाया जा सके और प्रक्रियागत देरी कम हो।
रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए उन्होंने एक समर्पित प्लेसमेंट सेल स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जो उद्योगों और संस्थानों से जुड़ा होगा। साथ ही, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ छात्र विनिमय कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना है, जहां वे पहले दो दशकों तक कार्यरत रहे।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में स्थान बनाने का भी लक्ष्य रखेगा। मधुसूदन दास की विरासत को सम्मान देने के लिए “मधुसूदन चेयर” और “मधुसूदन लीगल फोरम” की स्थापना की जाएगी, जिसमें हर महीने प्रतिष्ठित व्यक्तियों के व्याख्यान आयोजित होंगे।
अनुशासन पर जोर देते हुए उन्होंने नियमित कक्षाएं, समय पर पाठ्यक्रम पूरा करना, सख्त उपस्थिति नियम और परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी पर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने की बात कही। जिन छात्रों की उपस्थिति कम होगी, उन्हें परीक्षा फॉर्म भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कुलपति ने मानवाधिकार सेल और लीगल एड सेल को पुनर्जीवित करने तथा वंचित वर्गों की सेवा के लिए छात्रों में प्रो बोनो संस्कृति को बढ़ावा देने की भी घोषणा की। इसके अलावा, संस्थागत क्षमता और छात्र सहायता प्रणाली को मजबूत करने के लिए केंद्र की मिशन कर्मयोगी और ओडिशा सरकार की शक्तिश्री योजना को लागू करने का प्रस्ताव भी रखा।
त्रिपाठी ने कहा कि डिग्री सिर्फ बांटी नहीं जानी चाहिए, बल्कि हमारे छात्र राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह तैयार होने चाहिए।