चिलिका झील की जैव विविधता के संरक्षण और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कानून, निर्माण एवं आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने की। चर्चा का मुख्य केंद्र चिलिका झील के समक्ष मौजूद पारिस्थितिक चुनौतियां रहीं। उल्लेखनीय है कि चिलिका झील एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है और अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर आर्द्रभूमि के रूप में वैश्विक पहचान रखती है।
लोक सेवा भवन के सम्मेलन कक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री हरिचंदन ने चिलिका के मुहाने पर बढ़ रही गाद जमाव (सिल्टेशन) को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुहाने में रुकावट के कारण झील और समुद्र के बीच प्राकृतिक जल विनिमय बाधित हो रहा है, जिससे झील की लवणता (सैलिनिटी) धीरे-धीरे कम हो रही है।
मंत्री ने बताया कि लवणता में यह असंतुलन चिलिका की समृद्ध जैव विविधता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों की संख्या एवं प्रजातियों में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है।
तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने पर जोर देते हुए हरिचंदन ने संबंधित विभागों, चिलिका विकास प्राधिकरण (CDA) और आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञों को बिना विलंब पुनर्स्थापन कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने विस्तृत वैज्ञानिक आंकड़ों के संग्रह और दीर्घकालिक संरक्षण एवं विकास के लिए एक समग्र विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
चिलिका को ओडिशा के गौरव का प्रतीक बताते हुए मंत्री ने कहा कि इसकी पारिस्थितिक सेहत को टिकाऊ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बहाल किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई, जिनमें गाद से भरे मुहाने की ड्रेजिंग, उपयुक्त लवणता स्तर बनाए रखना, जल धारण क्षमता बढ़ाने के लिए जमी हुई गाद को हटाना, जैव विविधता का संरक्षण, आसपास के क्षेत्रों का विकास तथा चिलिका पर निर्भर समुदायों की आजीविका की सुरक्षा शामिल है।
मंत्री हरिचंदन ने बताया कि बैठक के निष्कर्षों और प्रस्तावित कार्ययोजना का स्पष्ट रोडमैप शीघ्र ही मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की कार्ययोजना से केंद्र सरकार को अवगत कराया जाएगा ताकि सभी स्तरों पर समन्वय और सहयोग सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में सांसद संबित पात्रा, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव भास्कर ज्योति शर्मा, आईआईटी चेन्नई की प्रोफेसर नीलांजना साहा, चिलिका विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी योगजया नंदा, चिलिका डीएफओ अमलान नायक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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