इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन एंड रिसर्च (आईटीईआर) के पूर्व प्राचार्य एवं प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. वीर किशोर सरप का गुरुवार को यहां निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
अपने पीछे वे एक पुत्र और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था। प्रो. सरप ने शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान (एसओए) डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के प्रारंभिक वर्षों में नेतृत्व प्रदान कर संस्था को सशक्त आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद के रूप में उन्होंने कई वर्षों तक आईआईटी खड़गपुर में विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके साथ ही वे डीआरडीओ द्वारा विकसित अग्नि मिसाइल के कुछ घटकों के डिजाइन में भी शामिल रहे।
इससे पूर्व उन्होंने बुर्ला स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (वर्तमान में वीर सुरेंद्र साई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी) के प्राचार्य के रूप में भी सेवाएं दी थीं।
सोआ के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मनोजरंजन नायक ने प्रो. सरप के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने प्रो. सरप को एक विशिष्ट शिक्षाविद, दूरदर्शी नेता और समर्पित शिक्षाशास्त्री बताते हुए कहा कि उनके अमूल्य योगदान से आईटीईआर और सोआ की शैक्षणिक नींव और संस्थागत संस्कृति को मजबूती मिली।
प्रो. सरप की शिक्षण और शैक्षणिक प्रशासन में उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता ने विद्यार्थियों और सहकर्मियों की पीढ़ियों को प्रेरित किया। वे अपनी ईमानदारी, विवेक और मानवीय नेतृत्व शैली के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे।
प्रो. (डॉ.) नायक ने कहा कि एसओए परिवार उनके निःस्वार्थ सेवा भाव और संस्था तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके स्थायी योगदान के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता है।