ओडिशा सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक लागू रहने वाली नई त्रैवार्षिक (तीन वर्ष की) आबकारी नीति की घोषणा की है। यह पहले लागू वार्षिक नीति से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने आज ओडिशा विधानसभा में नई आबकारी नीति पेश की।
नई नीति के अनुसार, विभिन्न आबकारी लाइसेंसों के आवेदन शुल्क में 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जबकि लाइसेंस शुल्क में हर वर्ष 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी। सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ शराब कारोबार को विनियमित करना है।
इसके अलावा, आबकारी शुल्क पर 0.5 प्रतिशत ‘डी-एडिक्शन सेस’ लगाया गया है, जिसमें शराब को हानिकारक पदार्थ मानते हुए नशा मुक्ति केंद्रों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण के लिए इस राशि का उपयोग किया जाएगा। साथ ही, आईएमएफएल (IMFL) और देशी शराब (CL) पर आबकारी शुल्क भी बढ़ाया गया है।
नई नीति के तहत मिनिमम गारंटीड क्वांटिटी (MGQ) प्रणाली को समाप्त कर मिनिमम गारंटीड एक्साइज रेवेन्यू (MGER) प्रणाली लागू की गई है, जिससे व्यापारियों पर निर्धारित मात्रा पूरी करने का दबाव कम होगा।
राज्य सरकार ने नए OFF, CL या OS शराब दुकानों को अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में नए ON दुकानों की अनुमति भी नहीं होगी, हालांकि औद्योगिक क्षेत्रों में 3-स्टार या उससे ऊपर के होटल और क्लबों को छूट दी गई है।
नीति के अनुसार, पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर और बड़दांड (ग्रैंड रोड) के आसपास आबकारी दुकानें संचालित नहीं होंगी तथा शराब की होम डिलीवरी पर प्रतिबंध रहेगा।
नई व्यवस्था के तहत आउट-स्टिल (OS) उत्पादन इकाइयों को आधुनिकीकरण, उन्नत पैकेजिंग और गुणवत्ता नियंत्रण उपकरण अनिवार्य रूप से अपनाने होंगे। साथ ही, ENA की आवाजाही और हर बोतल की उत्पादन से बिक्री तक निगरानी के लिए ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ प्रणाली लागू की जाएगी। राज्य की आबकारी रासायनिक प्रयोगशालाओं को भी आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन के जरिए मजबूत किया जाएगा।
यह नीति राजस्व वृद्धि और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने तथा आबकारी क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।