भुवनेश्वर ओडिशा मंत्रिमंडल ने ओडिशा स्टेट टैक्स ऑन प्रोफेशंस, ट्रेड्स, कॉलिंग्स एंड एम्प्लॉयमेंट्स एक्ट, 2000 में संशोधन हेतु एक अध्यादेश जारी करने का निर्णय लिया है, जिससे राज्य में प्रोफेशनल टैक्स समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
चूंकि ओडिशा विधानसभा का सत्र वर्तमान में नहीं चल रहा है, इसलिए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 213(1) के तहत अध्यादेश के माध्यम से इस सुधार को लागू करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य नागरिकों और व्यवसायों पर अनुपालन (कम्प्लायंस) का बोझ कम करना तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है।
वर्ष 2000 में राज्य के राजस्व को बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किए गए इस कानून के तहत विभिन्न पेशेवरों—जैसे चिकित्सक, सलाहकार, एजेंट, वेतनभोगी कर्मचारी, व्यापारी तथा अन्य संस्थाओं—पर प्रतिवर्ष अधिकतम 2,500 रुपये तक का प्रोफेशनल टैक्स लगाया जाता था। यहां तक कि कम या शून्य कारोबार वाले छोटे प्रतिष्ठानों और गैर-लाभकारी संगठनों को भी अधिकतम राशि का भुगतान करना पड़ता था।
वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य को प्रोफेशनल टैक्स से 316.97 करोड़ रुपये की आय हुई, जो राज्य के कुल स्वयं के कर राजस्व का केवल लगभग 0.56 प्रतिशत है। अधिकारियों के अनुसार, कर के आकलन, संग्रह और प्रवर्तन पर होने वाला प्रशासनिक खर्च इससे प्राप्त सीमित राजस्व की तुलना में कहीं अधिक है।
जीएसटी लागू होने के आठ वर्षों बाद प्रोफेशनल टैक्स को “वन नेशन, वन टैक्स, वन मार्केट” के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा रहा है। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), छोटे प्रतिष्ठानों और स्टार्ट-अप्स पर अनावश्यक अनुपालन बोझ पड़ रहा था, जो राज्य के व्यवसाय-अनुकूल वातावरण बनाने के प्रयासों के विपरीत था।
प्रस्तावित अध्यादेश से लाखों वेतनभोगी कर्मचारियों, पेशेवरों और छोटे व्यवसायों को राहत मिलने की उम्मीद है। अध्यादेश जारी होने के बाद इसकी प्रभावी तिथि और लागू करने की प्रक्रिया संबंधी विस्तृत जानकारी अधिसूचना के माध्यम से जारी की जाएगी।
यह निर्णय ‘विकसित ओडिशा’ के व्यापक दृष्टिकोण के तहत कर प्रणाली को सरल बनाने और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।