ओडिशा के कारगिल युद्ध के हीरो को अनदेखी, ग्रामीणों ने दी श्रद्धांजलि

  • Jul 27, 2018
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भुवनेश्वर, 27 जुलाईः

26 जुलाई को देश में कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है। भारत में इसे ऐतिहासिक दिवस के रूप में मनाया जाता है। कारगिल में अपनी देश की मिट्टी के लिए अपनी जान की आहुति देने वाले उन वीर जवानों के परिजनों को आज देश सलाम करता है। कारगिल विजय दिवस के 19वें साल पूरे होने के अवसर पर कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। लेकिन ओडिशा के दो वीर जवान गोपीनाथ महारणा और सचिदानंदा मलिक की स्मृति के लिए प्रशासन की ओर से ऐसे कोई कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया है। देश के लिए अपनी जान की आहुति देने वाले दोनों वीर जवान को पूरा गांव उन पर गर्व महसूस कर रहा है।

शहीद जवान गोपीनाथ महारणा कटक जिले के जनार्दनपुर गांव के रहने वाले थे। कारगिल युद्ध के दौरान गोपीनाथ सैनिकों को एक गाड़ी के जरिए लेकर जा रहे थे। उसी वक्त दुश्मनों को गोलियां उन पर चल गई। जहां वह शहीद हो गए। बेटे की तस्वीर को आज भी देखकर उनकी माँ की आँखों में आँसू आ रहे हैं। लेकिन आज कारगिल दिवस के मौके पर प्रशासन की ओर से कोई विशेष कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया है। इसके बावजूद भी वीर जवान गोपीनाथ की स्मृति को याद करते हुए अपना सिना गर्व से उठ जाता है।

दूसरी ओर केन्द्रापड़ा जिले के कंडिया गांव में शहीद जवान सचिदानंद मलिक की समाधि का उपेक्षा किया गया है। शहीद सचिदानंद की मूर्ति के लिए प्रशासन के द्वारा किए हुए वादे केवल फाइल पर दब कर रह गए हैं। इस मामले पर शहीद के परिजन औव बुद्धिजीवियों में अशंतोष का माहौल छाया हुआ है। लेकिन उनके गांव के लोगों ने देश के लिए दी गई अपनी जान की आहुति को नहीं भूले हैं।

इसके अलावा भद्रक जिले के चांदबाली ब्लॉक के पाघुंड़ा गांव के शहीद जवान निरंजन बेहरा को कारगिल विजय दिवस के मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई है। गांव के आखुली चरण बेहरा के बेटे निरंजन कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। देश के लिए शहीद होने पर ग्रामीण निरंजन पर काफी गर्व महसूस कर रहे हैं।  

 

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