माओवादियों के लिए घोषित आत्मसमर्पण (सरेंडर) की समयसीमा 31 मार्च को समाप्त होने के साथ ही ओडिशा पुलिस ने राज्य में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को अब बड़ा खतरा नहीं रहने का ऐलान किया है।
एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजीव पंडा ने बताया कि अब केवल कंधमाल जिले के कुछ हिस्सों में ही गिने-चुने माओवादी सक्रिय बचे हैं और सुरक्षा बल जल्द ही उन्हें पूरी तरह समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
पंडा ने इस सफलता का श्रेय सुरक्षा बलों, राज्य सरकार और आम जनता के संयुक्त प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि मलकानगिरी और कोरापुट समेत आठ जिलों से माओवादी प्रभाव पूरी तरह खत्म कर दिया गया है और अब उनकी गतिविधियां केवल कंधमाल के सीमित क्षेत्र तक सिमट गई हैं।
उन्होंने बताया, “2025 से अब तक मलकानगिरी, कोरापुट, बलांगीर, बौध, नुआपड़ा, नवरंगपुर, रायगढ़ा और कलाहांडी जिलों से माओवादियों की मौजूदगी समाप्त कर दी गई है।”
पुलिस अधिकारी ने माओवादी हिंसा में शहीद हुए 239 सुरक्षा कर्मियों और 359 नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस सफलता को उनके बलिदान को समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि माओवादियों की पुनः सक्रियता रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में अगले दो वर्षों तक सुरक्षा बलों की तैनाती जारी रहेगी। वर्ष 2025–26 के दौरान 27 माओवादी मारे गए, नौ गिरफ्तार किए गए और 120 ने आत्मसमर्पण किया।
उन्होंने कहा कि मैं पुलिस के शहीद जवानों और हिंसा के शिकार नागरिकों को श्रद्धांजलि देता हूं। माओवाद के खिलाफ यह सफलता उनके सर्वोच्च बलिदान को समर्पित है।”