एसजेटीए ने रत्न भंडार सूचीकरण के लिए दो कमेटियों का किया गठन

  • Feb 24, 2026
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पुरी,24 फरवरीः

श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की सूचीकरण और मूल्यांकन प्रक्रिया की निगरानी व क्रियान्वयन के लिए दो अलग-अलग कमेटियों का गठन किया है।

एसजेटीए के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद पाढ़ी ने मंगलवार को प्रेसकांफ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ओडिशा सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी दे दी है।

प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए दो-स्तरीय तंत्र बनाया गया है। एक पर्यवेक्षण समिति (सुपरवाइजरी कमेटी) पूरे कार्य की निगरानी करेगी, जबकि एक संचालन समिति (हैंडलिंग कमेटी) रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य सामान की भौतिक गणना और मूल्यांकन का कार्य करेगी।

मुख्य प्रशासक ने बताया कि जिम्मेदारियों का यह विभाजन पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।

 राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत 14 पृष्ठों की एसओपी में भौतिक सत्यापन, दस्तावेजीकरण, सुरक्षा प्रबंध और मूल्यांकन की प्रक्रियाओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। मंजूरी के बाद मंदिर प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों ने दिशा-निर्देशों के अनुरूप क्रियान्वयन रणनीति पर चर्चा के लिए बैठक भी की।

 रत्न भंडार की सूचीकरण और मूल्यांकन प्रक्रिया का उद्देश्य मंदिर कोषागार के अभिलेखों को सुव्यवस्थित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। डॉ. पाढ़ी ने कहा कि इस प्रक्रिया से 1978 की सूची के साथ मिलान और तुलना भी संभव हो सकेगी।

 एसजेटीए ने मार्च से लेकर वार्षिक रथ यात्रा के समापन अनुष्ठान नीलाद्री बीजेतक के मंदिर कैलेंडर की समीक्षा की है। अगले 135 दिनों में से लगभग 100 दिन प्रमुख त्योहारों, रथ यात्रा, नियमित अनुष्ठानों और विशेष रूप से सप्ताहांत में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण अनुपयुक्त पाए गए हैं।

 नीलाद्री बीजे से पहले लगभग 24 दिनों को इस कार्य के लिए उपयुक्त माना गया है, ताकि दैनिक पूजा-पाठ और श्रद्धालुओं के दर्शन में बाधा न आए।

 चयनित तिथियां श्रीजगन्नाथ मंदिर मैनेजिंग कमेटी के समक्ष विचारार्थ रखी जाएंगी। प्रबंध समिति विशेषज्ञों से परामर्श और शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए सूचीकरण और मूल्यांकन की तिथि व समय अंतिम रूप से तय करेगी।

 एसजेटीए के मुख्य प्रशासक ने बताया कि प्रक्रिया को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को विशिष्ट जिम्मेदारियां पहले ही सौंप दी गई हैं।

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