उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के आखिरी गढ़ सिलीगुड़ी नगर निगम में बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाने वाले पूर्व मंत्री गौतम देब ने सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र नगर निगम के कमिश्नर को भेज दिया है। हालिया विधानसभा चुनाव में उत्तर बंगाल के सभी प्रमुख जिलों में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद इस इस्तीफे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में संपन्न हुए साल 2026 के विधानसभा चुनाव में दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरदुआर और कूचबिहार जैसे जिलों में तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। सिताई सीट से पार्टी के टिकट पर जीतीं संगीता बसुनिया के भी बागी सुर देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में उत्तर बंगाल में सत्ता के नाम पर तृणमूल के पास एकमात्र सहारा सिलीगुड़ी नगर निगम ही बचा था। खुद गौतम देब सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे, जिसके बाद से ही नगर निगम बोर्ड पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।
गौतम देब ने गुरुवार को नगर निगम के मेयर-इन-परिषद के सदस्यों के साथ एक अहम बैठक की थी। इस बैठक में जब उन्होंने इस्तीफा देने की इच्छा जताई, तो तृणमूल कांग्रेस के पार्षदों के बीच आपसी फूट खुलकर सामने आ गई। सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल अभी एक साल से ज्यादा का बचा हुआ है, इसलिए कई पार्षद नहीं चाहते थे कि मेयर पद छोड़ें। पार्षदों के विरोध और मतभेदों के बावजूद गौतम देब अपने फैसले पर अड़े रहे और पद से इस्तीफा दे दिया।