उज्बेकिस्तान के यांगियोल (Yangiyoʻl) शहर में एक निर्माण कंपनी द्वारा पिछले चार महीनों से वेतन न दिए जाने के कारण 70 से अधिक ओड़िया श्रमिकों समेत सैकड़ों भारतीय मजदूर फंसे हुए हैं। बताया जा रहा है कि बकाया वेतन की मांग करने पर कुछ कर्मचारियों को काम से निकाल भी दिया गया। श्रमिक पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे हैं और तत्काल वेतन भुगतान की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो संदेश में एक श्रमिक ने कहा कि हम काम के लिए उज्बेकिस्तान आए थे, लेकिन पिछले 4–5 महीनों से हमें वेतन नहीं मिला है। हम गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं और हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हम ओडिशा सरकार और केंद्र सरकार से हमें बचाने की अपील करते हैं।
प्रभावित लोगों में गंजाम जिले के 10–15 श्रमिक शामिल हैं, जो फिटर, प्लंबर, वेल्डर और निर्माण श्रमिक के रूप में कार्यरत थे।
सानखेमुंडी ब्लॉक के खल्लिंगी निवासी जयराम साहू ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर से कंपनी ने हमारा वेतन नहीं दिया है। जब हमने मजदूरी मांगी तो हमें नौकरी से निकाल दिया गया और भारत लौट जाने को कहा गया। जयराम पिछले एक साल से अधिक समय से फिटर के रूप में काम कर रहे थे। श्रमिक -3 डिग्री सेल्सियस से 4 डिग्री सेल्सियस तक की कड़ाके की ठंड में पिछले दो हफ्तों से धरने पर बैठे हैं।
कुल मिलाकर, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के 500 से अधिक भारतीय मजदूर उज्बेकिस्तान में कंपनी की छह अलग-अलग साइटों पर फंसे होने की सूचना है।
इस संबंध में ब्रम्हपुर जिला श्रम अधिकारी शुभलक्ष्मी बेहरा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्तमान में कुछ इंजीनियर और श्रमिक वेतन न मिलने के कारण फंसे हुए हैं। सत्यापन प्रक्रिया जारी है। सानखेमुंडी के एक श्रमिक ने बताया है कि गंजाम से करीब 10–12 लोग प्रभावित हैं। सत्यापन के बाद संख्या बढ़ सकती है। प्रक्रिया पूरी होने पर हम श्रम आयुक्त को रिपोर्ट सौंपेंगे और उचित कदम उठाए जाएंगे।
फंसे हुए श्रमिकों ने ओडिशा सरकार और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर उनकी सुरक्षित वापसी और बकाया वेतन दिलाने की अपील की है।