माओवाद विरोधी अभियान को तेज करने और उग्रवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने अपनी नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति में संशोधन किया है। संशोधित नीति के तहत वित्तीय प्रोत्साहन राशि बढ़ाई गई है और पात्रता का दायरा भी विस्तारित किया गया है, जिससे अन्य राज्यों के माओवादी भी ओडिशा में आत्मसमर्पण कर पुनर्वास लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इस संबंध में ओडिशा सरकार के गृह विभाग ने अधिसूचना जारी की है।
अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने नक्सलियों के पुनर्वास पैकेज में नए नियम लागू किए हैं, जिनके तहत अखिल भारतीय कैडर को भी लाभ मिलेगा। संशोधित नीति के तहत आत्मसमर्पण के 60 दिनों के भीतर नक्सलियों को पुनर्वास सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
संशोधित नीति की प्रमुख विशेषताओं में केंद्रीय समिति या पोलित ब्यूरो सदस्यों के लिए अधिकतम 1.1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता, राज्य समिति सदस्यों के लिए 55 लाख रुपये तथा क्षेत्रीय समिति सदस्यों के लिए 33 लाख रुपये तक की सहायता शामिल है।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को हथियार और गोला-बारूद सौंपने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। इसके तहत लाइट मशीन गन (LMG) के लिए 4.95 लाख रुपये, एके-47 राइफल के लिए 3.30 लाख रुपये, इंसास या एसएलआर राइफल के लिए 1.65 लाख रुपये, प्रति ग्रेनेड 550 रुपये और प्रति गोली 55 रुपये दिए जाएंगे। जो माओवादी बिना हथियार के आत्मसमर्पण करेंगे, उन्हें अतिरिक्त 25,000 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा, जिन माओवादियों पर 5 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित है, उन्हें 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट राशि प्रदान की जाएगी।
संशोधित नीति का उद्देश्य सुरक्षा उपायों और पुनर्वास सहायता के माध्यम से शांति प्रक्रिया को तेज करना और माओवादी गतिविधियों को कमजोर करना है।