सोआ में एकदिवसीय ‘ओडिशा रीजनल कॉन्क्लेव’ का आयोजन

  • May 09, 2026
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भुवनेश्वर, 09 मई:

ओडिशा के 37 विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के कुलपति, प्रशासक और शिक्षाविदों ने उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। यह एकदिवसीय कॉन्क्लेव बीजू पटनायक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (बीपीयूटी) द्वारा आयोजित और सोआ डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को आयोजित किया गया।

टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) ओडिशा रीजनल कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने अकादमिक और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्टता की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि संस्थान वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकें।

 बीपीयूटी के कुलपति प्रो. अमिय कुमार रथ ने कहा कि ध्यान गुणवत्ता पर होना चाहिए। उन्होंने बताया कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, ताकि यह समझा जा सके कि किसी संस्थान को उत्कृष्ट श्रेणी में शामिल होने के लिए किन पहलुओं पर काम करना आवश्यक है।

 सोआ के कुलपति प्रो. प्रदीप्त कुमार नंद और ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च (OUTR) के कुलपति प्रो. विभूति भूषण बिस्वाल ने भी कॉन्क्लेव को संबोधित किया। प्रो. नंद ने कहा कि तकनीकी प्रगति और नई चुनौतियों के कारण विश्वविद्यालय शिक्षा में बड़ा बदलाव आया है। विश्वविद्यालय केवल स्वतंत्र संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि उन्हें समाज से जुड़कर कार्य करना चाहिए।

 प्रो. बिस्वाल ने कहा कि THE और QS जैसी रैंकिंग संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) के जनरल मैनेजर एवं सीनियर रीजनल डायरेक्टर (एशिया) रितिन मल्होत्रा ने अकादमिक और शोध उत्कृष्टता के मूल्यांकन पर वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

 सोआ के डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर) प्रो. ज्योति रंजन दास ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

कॉन्क्लेव में दो अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीक और शोध आदान-प्रदान के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी की संभावनाओं पर एक पैनल चर्चा भी हुई।

 इस अवसर पर ओड़िया यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. सत्य नारायण आचार्य, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के पूर्व कुलपति प्रो. कुमारबर दास तथा इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सरांग के निदेशक प्रो. बिभू प्रसाद पाणिग्रही भी उपस्थित रहे।

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