ओडिशा के सोनपुर के लोगों के लिए यह दिन अपार खुशी और आध्यात्मिक संतोष का अवसर लेकर आया है। 42 वर्षों से चले आ रहे दर्द और अनिश्चितता के अध्याय का अब अंत होने जा रहा है। वर्ष 1983 में ऐतिहासिक बड़ गोपालजी मंदिर से चोरी हुईं राधा-कृष्ण की पवित्र प्रतिमाएं, 12 अन्य अष्टधातु (आठ धातुओं के मिश्रण) की मूर्तियों के साथ, अब अपने मूल स्थान पर लौटने जा रही हैं।
इन पवित्र प्रतिमाओं की चोरी ने उस समय पूरे नगर को झंकझोर दिया था और श्रद्धालुओं के मन में गहरा भावनात्मक खालीपन छोड़ दिया था। हालांकि चोरी की गई प्रतिमाएं एक दशक बाद, 1993 में दिल्ली एयरपोर्ट से बरामद कर ली गई थीं, लेकिन लंबी कानूनी और प्रक्रियागत अड़चनों के कारण वे दशकों तक सार्वजनिक पूजा से दूर रहीं और भुवनेश्वर स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के भंडारगृह में सुरक्षित रखी गईं।
वर्षों के अथक प्रयासों और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार 10 दिसंबर 2025 को अदालत के फैसले ने प्रतिमाओं की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे दशकों पुरानी यह पीड़ा समाप्ति की ओर बढ़ी।
आज घोषित शुभ लग्न के अनुसार, पवित्र प्रतिमाओं को कोषागार से बाहर निकाला जाएगा और नगर में विधिवत शोभायात्रा के माध्यम से ले जाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान, आध्यात्मिक प्रवचन और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
इन प्रतिमाओं को दो फरवरी को सभी निर्धारित विधि-विधानों और परंपराओं के अनुसार बड़ा गोपालजी मंदिर में पुनः प्रतिष्ठित किया जाएगा। उनकी वापसी को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल प्रतिमाओं को मंदिर में लौटाएगा, बल्कि सोनपुर के लोगों की आस्था और आध्यात्मिक विरासत को भी नए सिरे से जीवंत करेगा।