छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और JCCJ अध्यक्ष अमित जोगी को दोषी करार दे दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने उन्हें तीन सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का भी आदेश दिया है। नवाई के दौरान याचिकाकर्ता और रामावतार के पुत्र सतीश जग्गी ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश के तहत की गई। सीबीआई ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें हत्या से जुड़े सबूत होने की बात आई। इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने पहले उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन बाद में मामला दोबारा खोला गया।
इस फैसले पर अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध सीबीआई की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया, बिना सुनवाई का अवसर दिए। मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है।
वहीं, याचिकाकर्ता सतीश जग्गी ने कहा कि जग्गी परिवार को आज न्याय मिला है। अमित जोगी मुख्य आरोपी थे उन्हें जेल जाने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया है। इसके लिए पूरा परिवार हाईकोर्ट का आभार व्यक्त करता है। लंबी लड़ाई के तहत 23 साल बाद न्याय मिला है। अमित जोगी अगर सुप्रीम कोर्ट जाते हैं तो आपका रुख क्या होगा ? इस पर सतीश जग्गी ने कहा मैं तो पहले ही सुप्रीम कोर्ट जा चुका हूं, वो आना चाहें तो आ जाएं उनका हक बनता है लेकिन वहां भी सतीश जग्गी को पाएंगे।