बलांगीर साइबर पुलिस ने म्यूल बैंक खातों के जरिए कथित रूप से संचालित किए जा रहे एक साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए करीब 35 लाख रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ी लेन-देन का पता चला है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी प्रकाश शर्मा और सनीश तथा बलांगीर के लोइसिंहा थाना क्षेत्र के निवासी प्रशान कुमार नाग और युवराज के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर रायपुर से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे थे और ग्रामीणों के नाम पर म्यूल बैंक खाते खुलवा रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल वित्तीय लेन-देन के लिए करने की अनुमति देने के बदले ग्रामीणों को कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस ने बताया कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल कथित साइबर ठगी से जुड़ी रकम को प्राप्त करने और उसे दूसरे खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। जांच के दौरान अब तक करीब 35 लाख रुपये के लेन-देन का पता लगाया गया है।
साइबर पुलिस द्वारा की गई छापेमारी के दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, कथित गिरोह का सरगना आदित्य दुबे और तीन अन्य आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहे। पुलिस ने फरार आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी के लिए अभियान शुरू कर दिया है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, 22 चेकबुक, 25 पासबुक और 10 डेबिट कार्ड भी जब्त किए हैं।
बलांगीर के सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) सरोज कुमार उपाध्याय ने बताया कि आरोपी कथित तौर पर लोगों को गुमराह करने और पुलिस की नजर से बचने के लिए अलग-अलग नाम और पहचान का इस्तेमाल करते थे।
उपाध्याय ने कहा कि वे कल्कि, अवतार, रावण और जोकर जैसे नामों का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह करते हैं। लोगों को भ्रमित करने के लिए वे इन नामों से बिजनेस ग्रुप के रूप में काम करते हैं। एसडीपीओ ने बताया कि आरोपी कथित तौर पर वर्चुअल सिम के जरिए व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करते थे, जिससे उनकी गतिविधियों का पता लगाना जांचकर्ताओं के लिए मुश्किल हो जाता था।
उन्होंने कहा कि वे सामान्य सिम कार्ड का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि व्हाट्सऐप पर बातचीत के लिए वर्चुअल सिम का इस्तेमाल करते हैं। इससे पुलिस के लिए उनका पता लगाना मुश्किल और समय लेने वाला हो जाता है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर साइबर ठगी से हासिल रकम को मुख्य ठगों से जुड़े बैंक खातों में स्थानांतरित करते थे। जांचकर्ता अब पूरे मनी ट्रेल का पता लगाने और इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटे हैं। उपाध्याय ने कहा कि मुख्य गिरोह के सरगनाओं की गिरफ्तारी के बाद सभी लेन-देन और पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने आएगी।