श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में चल रही बहुमूल्य वस्तुओं की सूची तैयार करने की प्रक्रिया में अब तक कोई भी गड़बड़ी सामने नहीं आई है। यह जानकारी इस कार्य की निगरानी कर रहे अधिकारियों ने सोमवार को दी।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी ने बताया कि चलंती भंडार (दैनिक उपयोग के आभूषण) और बाहर भंडार (त्योहारों में उपयोग होने वाले आभूषण) में रखे गहनों की गणना सीसीटीवी निगरानी में पूरी कर ली गई है। फिलहाल मंदिर के खजाने के आंतरिक कक्ष, यानी भीतरी भंडार (भितर भंडार) की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने कहा कि रत्न भंडार में रखे सभी आभूषण- जिनमें सोना और कीमती रत्न शामिल हैं - अब तक 1978 की सूची से पूरी तरह मेल खा रहे हैं। एक भी विसंगति नहीं पाई गई है। उन्होंने इस सुचारु प्रक्रिया का श्रेय भगवान की कृपा को दिया।
यह प्रक्रिया 25 मार्च से शुरू हुई थी, जिसे चंदन यात्रा के चलते 18 अप्रैल से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य त्योहार के बाद उचित समय पर फिर से शुरू किया जाएगा।
अधिकारियों ने इसकी समाप्ति की समयसीमा बताने से इनकार किया है। एक अधिकारी ने बताया कि 1978 में हुई पिछली गणना में 72 दिन लगे थे, जबकि इस बार अब तक 9 दिन का काम पूरा हो चुका है।
श्रीमंदिर रत्न भंडार निरीक्षण समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बिश्वनाथ रथ ने कहा कि सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इस सत्यापन प्रक्रिया में रत्न विशेषज्ञों, स्वर्णकारों और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
पारदर्शिता और दस्तावेजीकरण को बढ़ाने के लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जा रही है और खजाने में मौजूद वस्तुओं की 3D मैपिंग भी की जा रही है।