ओडिशा के पांच जिलों में ओड्राफ की 24 व एनडीआरएफ की छह टीमें तैनात

  • Oct 25, 2026
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भुवनेश्वर,25 अक्टूबरः

ओडिशा सरकार ने 28 अक्टूबर को ओडिशा-आंध्र प्रदेश तट की ओर संभावित चक्रवात के बढ़ने की आशंका के मद्देनजर आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य के पांच दक्षिणी जिलों में ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओड्राफ) की 24 टीमें और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की छह टीमें तैनात की गई हैं।

जिन पांच जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, उनमें गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी शामिल हैं। मौसम प्रणाली के प्रभाव से इन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका है।

 भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, चक्रवात दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के बीच तट से टकरा सकता है। हालांकि, इसके आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना अधिक बताई गई है।

 तैयारियों के तहत राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था मजबूत करने और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

तैनाती योजना के अनुसार, गंजाम जिले में ओड्राफ की नौ और एनडीआरएफ की दो टीमें तैनात की गई हैं। वहीं, गजपति जिले में ओड्राफ की छह और एनडीआरएफ की एक टीम तैनात रहेगी।

रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में से प्रत्येक में ओड्राफ की तीन और एनडीआरएफ की एक टीम तैनात की गई है।

आसन्न मौसम संबंधी खतरे को देखते हुए जिला स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने मुख्यालय में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं।

 आपातकालीन कार्रवाई में समन्वय स्थापित करने और लोगों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिला, ब्लॉक, तहसील और शहरी स्थानीय निकाय स्तर पर 24 घंटे संचालित होने वाले नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए गए हैं। इसके अलावा, विशेष हेल्पलाइन नंबर और टोल-फ्री सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

 प्रशासन कच्चे मकानों, फूस की झोपड़ियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की पहचान कर रहा है, ताकि उन्हें चक्रवात आश्रय स्थलों सहित सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। प्रसव की संभावित तारीख नजदीक होने वाली गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।

 राज्य सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं से युक्त चक्रवात आश्रय स्थलों को भी तैयार रखा है। इन सभी उपायों का उद्देश्य सरकार के ‘शून्य जनहानि’ लक्ष्य को हासिल करना है।

 एहतियात के तौर पर समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं, पांचों जिलों में पहाड़ियों, झरनों, बांधों और अन्य दर्शनीय स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही भी प्रतिबंधित कर दी गई है।

 कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे 80 से 85 प्रतिशत तक पक चुकी धान, मक्का और रागी जैसी फसलों की कटाई कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रख लें। किसानों की सहायता के लिए विशेष कृषि हेल्पलाइन भी शुरू की गई हैं।

 अन्य तैयारियों के तहत पानी में क्लोरीन मिलाने, अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और सामग्री का पर्याप्त भंडार रखने तथा सांप के काटने के इलाज के लिए एंटीवेनम और क्लोरीन की गोलियां उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली और दूरसंचार सेवाओं में व्यवधान होने की स्थिति में उन्हें जल्द बहाल करने के लिए आवश्यक उपकरण भी तैयार रखे गए हैं।

 पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से पशु चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में पशु चारा और सूखा चारा वितरित करने की भी व्यवस्था की गई है।

 संवेदनशील क्षेत्रों और आवश्यक सेवाओं के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। त्वरित सूचना साझा करने और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए उन्हें विशेष व्हाट्सऐप समूहों से जोड़ा गया है।

 जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने, आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने और आपात स्थिति के दौरान प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की है।

 इस बीच, एहतियाती कदम के तौर पर गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे।

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Khabar East

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