सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) देशभर के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर बढ़ते सुरक्षा खतरों—खासकर ड्रोन हमलों और साइबर घुसपैठ—से निपटने के लिए अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने की योजना बना रहा है।
भुवनेश्वर में बल के 57वें स्थापना दिवस से पहले गुरुवार को मीडिया से बातचीत करते हुए सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि आगामी आधुनिकीकरण योजना के तहत ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि अगली मॉडर्नाइजेशन योजना में हम बड़े पैमाने पर ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रशिक्षण शुरू करेंगे। हाल के वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों, जैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हुए ड्रोन हमलों और ईरान में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह बात कही।
तैयारी को मजबूत करने के लिए सीआईएसएफ ने पहले ही राजस्थान के बहरोड़ स्थित अपनी यूनिट में ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया है। साथ ही गृह मंत्रालय ने एक रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) स्थापित करने की मंजूरी दी है, जहां ड्रोन संचालन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
रंजन ने बताया कि महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हवाई खतरों से निपटने के लिए सीआईएसएफ को नोडल एजेंसी बनाया गया है, इसलिए इस क्षेत्र में उन्नत क्षमताओं का विकास जरूरी है।
हवाई खतरों के साथ-साथ बल साइबर सुरक्षा को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। सीआईएसएफ प्रमुख ने कहा कि डिजिटल सिस्टम पर बढ़ती निर्भरता के कारण सॉफ्टवेयर और नेटवर्क सुरक्षा बेहद अहम हो गई है।
उन्होंने कहा कि आजकल हर क्षेत्र साइबर खतरों का सामना कर रहा है। अधिकतर संचालन डिजिटल होने के कारण सिस्टम सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि इन खतरों से निपटने के लिए विशेष साइबर कमांडो भी तैयार किए जा रहे हैं।
2026–30 की आधुनिकीकरण योजना के तहत CISF ने ₹819 करोड़ की लागत वाले 76 खरीद और क्षमता-विकास प्रस्तावों की पहचान की है। इनमें उन्नत ड्रोन समाधान, एक एकीकृत साइबर सुरक्षा प्रयोगशाला की स्थापना, समर्पित डेटा सेंटर और डिजिटल ढांचे की सुरक्षा के लिए ‘जीरो-ट्रस्ट नेटवर्क आर्किटेक्चर’ लागू करना शामिल है।
इससे पहले दिन में सीआईएसएफ के महानिदेशक ने स्टेट गेस्ट हाउस भुवनेश्वर में सीनियर ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस-2026 की अध्यक्षता की। देशभर के विभिन्न गठन से आए वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बैठक में भाग लिया।
सम्मेलन का विषय था—“प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण: प्रशिक्षण पहल और कौशल विकास के माध्यम से पेशेवर दक्षता को बढ़ाना।” इसमें आधुनिक प्रशिक्षण तकनीकों को अपनाने, कौशल विकास बढ़ाने और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने पर चर्चा हुई।
सीआईएसएफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि देश की महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की सुरक्षा के लिए वह प्रशिक्षण मानकों और पेशेवर क्षमता को लगातार उन्नत करता रहेगा।