राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या से निपटने और उनके कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए ओडिशा सरकार एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगी। मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक ने शनिवार को यह जानकारी दी। पत्रकारों से बातचीत में मल्लिक ने बताया कि शुक्रवार को परिवहन मंत्री विभूति भूषण जेना की अध्यक्षता में हुई बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने और उनके उचित पुनर्वास को सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की गई।
मल्लिक ने कहा कि बैठक में परिवहन आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारी और हमारे विभाग के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या, उनके कारण होने वाली दुर्घटनाओं और जानमाल के नुकसान को रोकने के उपायों पर चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 100 से 150 किलोमीटर के अंतराल पर गौशालाएं स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। हाईवे पर पाए जाने वाले आवारा मवेशियों को इन गौशालाओं में पहुंचाया जाएगा, जहां मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास विभाग की देखरेख में उनकी उचित देखभाल की जाएगी। मंत्री के अनुसार, गौशालाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी सामाजिक संगठनों को सौंपी जा सकती है, जबकि इसका खर्च विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।
मल्लिक ने यह भी बताया कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों, जिनमें पुलिस अधीक्षक (एसपी) और थाना प्रभारियों (आईआईसी) सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं, को राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने में सहयोग करने का निर्देश दिया जाएगा। इन उपायों से मवेशियों की तस्करी पर रोक लगाने और पशुओं से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने कहा कि हम फिलहाल दिशा-निर्देश तैयार कर रहे हैं और इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि इन्हें तत्काल कैसे लागू किया जा सकता है। इस विषय पर अगली बैठक में चर्चा की जाएगी और एसओपी को अंतिम रूप दिया जाएगा।
प्रस्तावित कदमों का उद्देश्य राज्यभर में सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना, पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है।