बालेश्वर से बचाए गए पांच में से दो ऑरंगुटान नंदनकानन में इलाजरत

  • Sep 10, 2026
Khabar East:Two-Of-Five-Baleshwar-Rescued-Orangutans-Under-Treatment-At-Nandankanan
भुवनेश्वर,10 सितंबरः

बालेश्वर जिले के एक वन क्षेत्र से बचाए गए पांच ऑरंगुटानों में से दो का नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में इलाज चल रहा है, जबकि अन्य तीन की हालत स्थिर है। एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। नंदनकानन के उपनिदेशक प्रदीप मिरासे ने बताया कि एक ऑरंगुटान को बुखार हो गया था और वह इलाज का अच्छा असर दिखा रहा है। वहीं, एक अन्य युवा ऑरंगुटान के मल की जांच में कृमि संक्रमण (Worm Infection) पाया गया, जिसके बाद उसे दवा दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए ऑरंगुटानों के बाड़े को नियमित रूप से कीटाणुरहित (Disinfect) किया जा रहा है।

 चिड़ियाघर प्रशासन केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की सलाह पर सभी पांच ऑरंगुटानों का डीएनए परीक्षण भी कराएगा। मिरासे ने बताया कि सभी जानवरों के पूरी तरह स्वस्थ होने के करीब 10 दिन बाद उनके रक्त के नमूने लिए जाएंगे।

इन ऑरंगुटानों को आठ सितंबर को बालेश्वर जिले के एक वन क्षेत्र से बचाया गया था। ओडिशा में इनके पाए जाने के बाद इनके मूल स्थान को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ऑरंगुटान भारत की मूल प्रजाति नहीं है।

 ओडिशा के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने कहा है कि सभी पांच ऑरंगुटानों को नंदनकानन में ही रखने के प्रयास किए जाएंगे।

इस बीच, स्पेशल टास्क फोर्स (STF), वन विभाग और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त जांच जारी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ये ऑरंगुटान कहां से आए, इन्हें ओडिशा कौन लेकर आया और वे राज्य तक कैसे पहुंचे।

जांचकर्ताओं को आशंका है कि इन जानवरों को बाहर से ओडिशा लाया गया होगा, क्योंकि ऑरंगुटान न तो ओडिशा की मूल प्रजाति है और न ही भारत की।

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