ओडिशा विधानसभा में बुधवार को पेश किए गए श्वेत पत्र के अनुसार, वर्ष 2025 में राज्यभर में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदायों से जुड़े सांप्रदायिक तनाव के कुल 122 मामले दर्ज किए गए। गृह विभाग ने बताया कि इनमें 106 घटनाएं हिंदू-मुस्लिम समुदायों से संबंधित थीं, जबकि 16 घटनाएं हिंदू-ईसाई समुदायों के बीच हुईं। इन मामलों में कुल 165 आपराधिक केस दर्ज किए गए।
दस्तावेज में यह भी खुलासा हुआ कि वर्ष के दौरान राज्य के विभिन्न थानों में 1,095 दंगा मामले दर्ज किए गए। इनमें से 498 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि 548 मामले अभी जांचाधीन हैं और जल्द ही उनमें चार्जशीट दाखिल किए जाने की संभावना है।
रिपोर्ट में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई को भी रेखांकित किया गया। इसमें बताया गया कि पिछले वर्ष कटक में दुर्गा पूजा (दशहरा) के दौरान उत्पन्न सांप्रदायिक तनाव को खुफिया सूचनाओं के समन्वय और समय पर पुलिस तैनाती के जरिए प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया गया।
इसी तरह, पुरी में रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर के पास भारी भीड़ के कारण उत्पन्न भगदड़ जैसी स्थिति को प्रशासन और पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप से जल्द काबू में कर लिया गया।
सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने राज्य स्तरीय सांप्रदायिक समन्वय समिति का गठन किया है, जो समय-समय पर स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाती है। इसके अलावा, सांप्रदायिक हिंसा पर नियंत्रण और सौहार्द बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देशों वाली विस्तृत मैनुअल भी कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को जारी की गई है।
सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार ने वर्ष 2025 में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) की स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार कंधमाल, बौध, कलाहांडी, रायगढ़ा, नुआपड़ा, बलांगीर, मलकानगिरि और कोरापुट सहित नौ पुलिस जिलों में केवल “छिटपुट माओवादी गतिविधियां” दर्ज की गईं, जो उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं में कमी का संकेत है।