भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ओडिशा विजिलेंस ने सुनाबेड़ा वन्यजीव मंडल के डीएफओ कार्यालय में कार्यरत एक वरिष्ठ सहायक को 2.60 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि के कथित गबन के आरोप में गिरफ्तार किया।
आरोपी की पहचान बाबुलु सुना के रूप में हुई है। वह नुआपड़ा जिले के सुनाबेड़ा वन्यजीव मंडल के संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) कार्यालय के स्थापना अनुभाग में वरिष्ठ सहायक के साथ प्रभारी के रूप में कार्यरत था। उस पर एमएसीपी/आरएसीपी योजना के तहत फर्जी बिल तैयार कर सरकारी धन के गबन का आरोप है। उसे भवानीपटना स्थित विशेष न्यायाधीश (विजिलेंस) की अदालत में पेश करने की प्रक्रिया की जा रही है।
पिछले छह महीने से फरार चल रहे सुना को ओडिशा विजिलेंस ने शुक्रवार रात बलांगीर से गिरफ्तार किया।
विजिलेंस के अनुसार, सुना ने स्थापना अनुभाग के प्रभारी के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए धोखाधड़ी वाले वित्तीय लेन-देन किए। उसने संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (MACP) और संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (RACP) योजनाओं के तहत बकाया राशि के फर्जी बिल तैयार किए।
इन फर्जी बिलों को सुनाबेड़ा वन्यजीव मंडल के पूर्व कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और मृत कर्मचारियों के नाम एवं पहचान का दुरुपयोग करके संसाधित किया गया। इसके जरिए सरकारी धन को उसके परिवार के सदस्यों—पत्नी, भाई और बहन—के साथ-साथ दो करीबी सहयोगियों के निजी बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया।
इसके अलावा, आरोपी ने आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर कर अपने वेतन में निर्धारित अधिकार से अधिक समय-समय पर वृद्धि करवाई। उसने हर महीने के वेतन के अतिरिक्त बिल भी तैयार किए और इस तरह 10.58 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि अवैध रूप से प्राप्त की। जांच में कुल 2,60,21,306 रुपये के सरकारी धन के गबन का पता चला है।
इस मामले में कोरापुट विजिलेंस थाना में केस संख्या 24 और 25/2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।