केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के कार्यकाल को नौ महीने बढ़ाकर अब 13 जनवरी 2027 तक कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह न्यायाधिकरण पहले 13 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाला था, लेकिन अब इसे ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल बंटवारे के विवाद के निपटारे के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। आज इस मामले में एक महत्वपूर्ण सुनवाई निर्धारित है। ओडिशा के महाधिवक्ता पिताम्बर आचार्य राज्य का पक्ष रखने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।
महानदी जल विवाद वर्षों से दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच लंबित है। इस न्यायाधिकरण का गठन 2018 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया गया था। अब तक यह 49 सुनवाई कर चुका है और फिलहाल अपने अंतिम चरण में है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों ने बातचीत के माध्यम से सौहार्दपूर्ण समाधान की उम्मीद जताई है। हाल के महीनों में न्यायाधिकरण के सदस्यों ने जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए दोनों राज्यों में महानदी बेसिन का दौरा भी किया था।
न्यायाधिकरण का कार्यकाल बढ़ाना आवश्यक हो गया था, क्योंकि इसकी पूर्व निर्धारित अवधि 13 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही थी और सीमित समय में सुनवाई प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी।