ओडिशा क्राइम ब्रांच की साइबर पुलिस ने फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ZAIF के जरिए किए जा रहे एक बड़े ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया है।
यह घोटाला तब सामने आया जब एक व्यवसायी से फेसबुक के माध्यम से एक महिला ने संपर्क किया। महिला ने खुद को संजना श्रीनिवासन, हांगकांग स्थित आईबीएम (IBM) की सॉफ्टवेयर डेवलपर बताते हुए भरोसा जीता। इसके बाद उसने व्यवसायी को व्हाट्सएप पर बातचीत के लिए राजी किया और उसे ZAIF नामक क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर खाता खोलने के लिए प्रेरित किया।
23 मई से 24 जून के बीच पीड़ित ने महिला के निर्देश पर विभिन्न बैंक खातों में 6.16 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की।
इंस्पेक्टर राजेंद्र भोला के नेतृत्व में की गई जांच में सामने आया कि पीड़ित को सुनियोजित तरीके से इस धोखाधड़ी में फंसाया गया था। जब पीड़ित ने अपनी राशि निकालने का प्रयास किया तो उससे बैलेंस अमाउंट का 20 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करने को कहा गया। इसके बाद उसने 89 लाख और जमा किए, लेकिन तथाकथित “रिस्क कंट्रोल टीम” ने एक के बाद एक बहाने बनाकर उसकी राशि जारी नहीं की।
इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह अज्ञात साइबर ठगों, ZAIF ट्रेडिंग कंपनी और उनके सहयोगियों द्वारा रची गई एक सुनियोजित साजिश का शिकार हो चुका है। इसके बाद उसने साइबर क्राइम पुलिस थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई।
पीड़ित की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और आंध्र प्रदेश से वेदगिरी श्रीनिवासराव (39) को गिरफ्तार किया। उसके पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड समेत आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई है।
इस मामले में इससे पहले भी जांच अधिकारी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुके हैं, जिनमें पांच सूरत से और एक लुधियाना (पंजाब) से है।
साइबर क्राइम पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर आने वाले अनचाहे निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहें, निवेश से पहले संबंधित व्यक्ति और प्लेटफॉर्म की पूरी जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में तुरंत दें।