ओडिशा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिग ने विधानसभा में बताया कि राज्य की शिशु मृत्यु दर (IMR) 30 है, जो राष्ट्रीय औसत 25 से अधिक है।
हालांकि मंत्री ने बताया कि पिछले दस वर्षों में ओडिशा में शिशु मृत्यु दर में 21 अंकों की कमी आई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इसी अवधि में 15 अंकों की कमी दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह जानकारी विधायक तारा प्रसाद वाहिनीपति के सवाल के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण पहल कर रही है।
गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। आपातकालीन चिकित्सा सुविधा देने के लिए फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) स्थापित किए गए हैं, जहां जरूरतमंदों को महत्वपूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को सहायता देने के लिए मां गृह योजना चलाई जा रही है। वहीं बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिए स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) स्थापित किए गए हैं।
माताओं को स्तनपान के लिए सहायता और शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (LMU) भी स्थापित किए गए हैं।
इसके अलावा होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (HBNC) कार्यक्रम और विलेज हेल्थ, सैनिटेशन एंड न्यूट्रिशन डे (VHSND) के माध्यम से समुदाय स्तर पर नवजात और मातृ स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और सेवाएं दी जा रही हैं।
मंत्री ने बताया कि राज्य में 10 MLCU और 15 NBSU स्थापित किए गए हैं, जहां अब तक 10,888 कम वजन वाले नवजात शिशुओं का इलाज किया जा चुका है।
उन्होंने यह भी बताया कि बीमार शिशुओं की देखभाल और माताओं को स्तनपान में मदद देने के लिए 28 लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (LMU) स्थापित की गई हैं।
साथ ही होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (HBNC) कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ता नवजात शिशु के जन्म के बाद 42 दिनों के भीतर 6 से 7 बार घर जाकर जांच और देखभाल करती हैं।