श्री जगन्नाथ मंदिर से जुड़े सबसे संवेदनशील और बहुप्रतीक्षित मुद्दों में से एक पर स्पष्टता लाते हुए, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति ने शनिवार को रत्न भंडार में रखे आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं की सूची (इन्वेंटरीकरण) तैयार करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को मंजूरी दे दी। हालांकि, यह प्रक्रिया ओडिशा सरकार की औपचारिक स्वीकृति के बाद ही शुरू की जाएगी।
यह निर्णय पुरी में गजपति महाराज दिव्य सिंह देव की अध्यक्षता में आयोजित समिति की एक अहम बैठक में लिया गया। बैठक में सूचीकरण की तिथि और शुभ मुहूर्त (शुभ लग्न) को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। अब स्वीकृत एसओपी को राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक डॉ. अरबिंद कुमार पाढ़ी ने कहा कि सूचीकरण की प्रक्रिया इस तरह से की जाएगी कि मंदिर की दैनिक नीतिकांति (दैनिक अनुष्ठान) पर कोई प्रभाव न पड़े। उन्होंने बताया कि सरकार की मंजूरी के बाद ही कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा और औपचारिक घोषणा की जाएगी।
रत्न भंडार के अलावा, बैठक में श्री मंदिर के सेवायतों (सेवकों) के बच्चों के लिए प्रस्तावित आदर्श गुरुकुल की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लंबे समय से लंबित भूमि अधिग्रहण की समस्या अब सुलझा ली गई है, जिससे गुरुकुल की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।
बैठक में मंदिर से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिनमें श्री मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, नाटमंडप में कतार दर्शन की व्यवस्था, दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सुविधा, पुरी निवासियों के लिए विशेष प्रावधान, महाप्रभु की दैनिक नीतियां तथा गुंडिचा मंदिर का उद्घाटन शामिल हैं।
डॉ. पाढ़ी ने बताया कि महाप्रभु के लिए एक नया स्वर्ण पालकी (सोने की पालकी) तैयार की गई है, जिसे शुभ लग्न तय होने के बाद स्थापित किया जाएगा।
इसी तरह, गुंडिचा मंदिर के उद्घाटन की तिथि भी उपयुक्त तिथि और लग्न देखकर तय की जाएगी। गुंडिचा मंदिर में प्रवेश के लिए 10 रुपये का शुल्क लिया जाएगा, हालांकि बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों को इससे छूट दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शुल्क राजस्व अर्जन के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था और नियंत्रण के उद्देश्य से लगाया गया है।
पुरी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत की खबर देते हुए बताया गया कि मंदिर द्वारा संचालित चार भक्त निवासों में पार्किंग शुल्क को 500 से घटाकर 240 कर दिया गया है।
इस बैठक में श्री मंदिर के उप मुख्य प्रशासक, पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ मंदिर अधिकारी और मंदिर प्रबंधन समिति के सभी सदस्य उपस्थित थे।