सीपीआई (माओवादी) के एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) रैंक का भूमिगत कैडर सुखराम मरकाम ने बुधवार को मलकानगिरी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के साथ ही उसने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में शामिल होने की घोषणा की।
सुखराम मरकाम, जिसे सुरेश या योगेश के नाम से भी जाना जाता है, कांगेरघाटी एरिया कमेटी का कमांडर था। वह छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुष्पाल थाना क्षेत्र अंतर्गत गोविंदपाल गांव का निवासी है।
आत्मसमर्पण के दौरान उसने एक एसएलआर राइफल, 7.62 एमएम के 12 राउंड कारतूस, एक मैगजीन, दो आईईडी (कुल 2 किलोग्राम), 10 मीटर कोडेक्स वायर, छह क्रैकर, एक इलेक्ट्रिक वायर, एक हैवरसैक, व्हिसल कोड, माओवादी वर्दी की एक जोड़ी, दो मीटर लाल कपड़ा, एक तिरपाल तथा बैटरी सहित एक टॉर्च पुलिस को सौंपा।
पुलिस थाने में दिए गए बयान में मरकाम ने उग्रवादी गतिविधियों से सभी संबंध तोड़ने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास जताने की औपचारिक घोषणा की। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उसका आत्मसमर्पण मलकानगिरी में माओवादियों के संचालनात्मक और वैचारिक नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है और इससे जिला नक्सलमुक्त बनने की दिशा में और आगे बढ़ेगा।
बताया जाता है कि सुखराम मरकाम ओडिशा और छत्तीसगढ़ में कई हिंसक घटनाओं में शामिल रहा है। पुलिस ने इस आत्मसमर्पण को क्षेत्र में माओवादी प्रभाव को कमजोर करने के प्रयासों में एक “बड़ी सफलता” करार दिया है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और राज्य पुलिस नेतृत्व लगातार माओवादी कैडरों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील करते रहे हैं। राज्य की नई आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति के तहत, आत्मसमर्पण करने वाले कैडर को कुल 21 लाख रुपये का इनाम, 25,000 रुपये की अंतरिम सहायता (जो पहले ही प्रदान की जा चुकी है), अंत्योदय गृह योजना के तहत एक मकान, एकमुश्त विवाह प्रोत्साहन राशि के रूप में 25,000 रुपये तथा समाज में सुचारु पुनर्वास के लिए अन्य लाभ दिए जाएंगे।
मलकानगिरी के पुलिस अधीक्षक विनोद पाटिल एच ने कहा कि इस घटनाक्रम से अन्य कैडरों को भी आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, मलकानगिरी को नक्सलमुक्त जिला बनाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र में शांति व विकास को बढ़ावा मिलेगा।