ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को केंदुझर जिले के बड़बिल में 420/220 केवी ग्रिड सबस्टेशन की आधारशिला रखी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,647 करोड़ रुपये है, जिसका उद्देश्य राज्य के विद्युत बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करना है। यह परियोजना उत्कल गौरव मधुसूदन दास की जयंती के अवसर पर शुरू की गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज संपदा और औद्योगिक संभावनाओं को देखते हुए केंदुझर को पूर्वी भारत का “दूसरा जमशेदपुर” बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने उच्चबली और केंदुझर के लिए सबस्टेशन सहित पांच नई ट्रांसमिशन लाइनों का उद्घाटन भी किया, जिससे क्षेत्र के बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। इन परियोजनाओं से केंदुझर सदर, तेलकोई, झुम्पुरा, जोड़ा और बड़बिल क्षेत्रों के लगभग 7.17 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि विकास के लिए भरोसेमंद बिजली आपूर्ति बेहद जरूरी है और सरकार निरंतर, गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार केंदुझर को खनिज संपदा के आधार पर एक बड़े औद्योगिक हब में बदलने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 400 केवी LILO लाइन, TTPS–जोड़ा और तुरुमुंगा–रायरंगपुर लाइनों के माध्यम से क्षेत्र को मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे औद्योगिक मांग और घरेलू खपत के बीच संतुलन बना रहेगा।
बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए सरकार ‘हॉटलाइन मेंटेनेंस सिस्टम’ लागू करेगी, जिससे मरम्मत कार्य के दौरान बिजली कटौती की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि मेंटेनेंस के समय बिजली बंद नहीं करनी पड़ेगी।
स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा का बिजली क्षेत्र पूरी तरह डिजिटाइजेशन की ओर बढ़ रहा है। मंचेश्वर में बनने वाला स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC) बिजली प्रबंधन का केंद्रीय केंद्र होगा, जबकि STAMS परियोजना के तहत 70 ग्रिड का रिमोट मॉनिटरिंग किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 2000 में 16 लाख से बढ़कर अब लगभग 1 करोड़ हो गई है। भविष्य की मांग को देखते हुए 2036 तक 34 नए ग्रिड सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिनमें भुवनेश्वर, जाजपुर, झारसुगुड़ा और गजपति में 765 केवी ग्रिड सिस्टम शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि केंदुझर में जापान की जेएफई स्टील द्वारा प्रस्तावित मेगा स्टील प्लांट और एक रिंग रोड परियोजना भी पाइपलाइन में है, जो अगले 20 वर्षों के औद्योगिक विकास को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि केंदुझर ने लंबे समय से ओडिशा की समृद्धि में योगदान दिया है और अब उसे उसका उचित विकास मिलना चाहिए। “खनिज संपदा के बल पर केंदुझर को विकास की स्वर्णभूमि बनाया जाएगा।”
इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरे ओडिशा में बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2028 तक राज्य बिजली की कमी से उबर जाएगा।
कार्यक्रम में केंदुझर सांसद अनंत नायक, तेलकोई विधायक डॉ. फकीर मोहन नायक, चंपुआ विधायक सनातन महाकुड़, ओपीटीसीएल के सीएमडी भास्कर ज्योति सरमा और जिला कलेक्टर विशाल सिंह भी मौजूद थे।