स्कूली किताबों में 1600 गलतियां, मुख्यमंत्री ने जताई साजिश की आशंका

  • Jun 26, 2026
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भुवनेश्वर,26 जूनः

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कक्षा 1 से 8 तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में 1,600 से अधिक त्रुटियां मिलने के मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे राज्य सरकार की छवि खराब करने की संभावित साजिश बताया है। इस मामले की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट भी सरकार को सौंप दी है।

एक अंग्रेजी दैनिक द्वारा आयोजित स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और पूरे प्रकरण की गहन जांच के आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गलतियां सामान्य नहीं हैं और इससे संदेह पैदा होता है कि सरकार को बदनाम करने की साजिश रची गई हो सकती है। उन्होंने पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और छपाई की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझे आशंका है कि यह सरकार को बदनाम करने की एक बड़ी साजिश हो सकती है। इस मामले की गहन जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था, जिसे सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में साजिश की पुष्टि होती है तो संशोधित किताबों की दोबारा छपाई पर होने वाला पूरा खर्च दोषी व्यक्तियों से वसूला जाएगा। साथ ही पूरी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों।"

 मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि छात्रों को वितरित की जा चुकी सभी त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों को तत्काल वापस लिया जाएगा और उनकी जगह संशोधित एवं त्रुटिरहित पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।

 उन्होंने कहा कि पहले भी पाठ्यपुस्तकों में कुछ गलतियां सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार त्रुटियों की संख्या असामान्य और बेहद चिंताजनक है। इसलिए पूरी प्रक्रिया की गहन समीक्षा आवश्यक है।

इस बीच, विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने मुख्यमंत्री द्वारा निर्धारित सात दिन की समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

 इससे पहले मुख्यमंत्री ने समिति को निर्देश दिया था कि वह पाठ्यपुस्तकों में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की पहचान कर सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

 स्कूली किताबों में भारी संख्या में त्रुटियां सामने आने के बाद शिक्षकों, अभिभावकों और विपक्ष ने सरकार की कड़ी आलोचना की थी। अब राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि छात्रों को खराब गुणवत्ता वाली पुस्तकों के कारण किसी प्रकार की परेशानी न हो और इस मामले में जल्द से जल्द जवाबदेही तय की जा सके।

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