दिलीप राय ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव लड़ने का किया ऐलान

  • Mar 03, 2026
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भुवनेश्वर,03 मार्चः

वरिष्ठ नेता दिलीप राय ने मंगलवार को घोषणा की है कि वे राज्यसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह पांच मार्च को नामांकन दाखिल करेंगे।

राय ने बताया कि यह कदम उठाने से पहले केंद्रीय और राज्य स्तर के नेतृत्व के साथ चर्चा की जा चुकी है। उनके चुनाव मैदान में उतरने से ओडिशा की महत्वपूर्ण चौथी राज्यसभा सीट के लिए मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

 इस बीच ओडिशा भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल ने कहा कि पार्टी सिद्धांत के आधार पर दिलीप राय की राज्यसभा उम्मीदवारी का समर्थन करेगी।

 अब यह मुकाबला दिलीप राय और दत्तेश्वर होता के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है। दत्तेश्वर होता को बीजू जनता दल (बीजद) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा गया है। बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक द्वारा होता के नाम का प्रस्ताव किए जाने के बाद कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया।

 अनुभवी राजनेता माने जाने वाले दिलीप राय पहले भी बीजद को मात देकर राज्यसभा पहुंच चुके हैं। उनके फिर से चुनावी मैदान में आने से राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि चौथी सीट आखिरकार किसके खाते में जाएगी दिलीप राय या दत्तेश्वर होता।

 दिलीप राय ने कहा कि मैं पांच मार्च को राज्यसभा के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करूंगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने समर्थन के लिए भाजपा या अन्य दलों के नेताओं से बातचीत की है, तो उन्होंने कहा कि चर्चा जारी है। मैंने अभी निर्णय लिया है और अब सभी से तुरंत बातचीत करूंगा।

 उन्होंने बताया कि राज्य और नई दिल्ली दोनों स्तरों पर बातचीत चल रही है तथा उन्होंने दावा किया कि वह अभी भी भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं।

 राय ने कहा कि मैंने आज निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया है। नामांकन परसों दाखिल करूंगा और उसके बाद आगे की चर्चा होगी।

 उल्लेखनीय है कि इससे पहले दिन में भाजपा ने ओडिशा से राज्यसभा चुनाव के लिए मनमोहन सामल और सुजीत कुमार के नामों की घोषणा की थी। पार्टी की केंद्रीय समिति ने आगामी चुनावों के लिए उनकी उम्मीदवारी को अंतिम रूप दिया।

 इस घोषणा को आगामी राजनीतिक मुकाबले को ध्यान में रखते हुए भाजपा की रणनीतिक चाल माना जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों उम्मीदवारों के अनुभव और संगठनात्मक क्षमता पर भरोसा जताया है।

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