ओडिशा सरकार ने इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और कंट्री लिकर (CL) पर आबकारी शुल्क बढ़ाने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद 1 अप्रैल 2026 से राज्यभर में शराब की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है। नई आबकारी शुल्क संरचना की अधिसूचना 26 मार्च को जारी की गई, जो 31 मार्च 2029 तक तीन वर्षों के लिए लागू रहेगी।
नई नीति के तहत व्हिस्की, जिन, रम, ब्रांडी और वोडका सहित IMFL पर मूल्य-आधारित उत्पाद शुल्क 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि बीयर और आयातित विदेशी शराब पर आबकारी शुल्क पहले की तरह ही रहेगा।
अस्का को-ऑपरेटिव शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड (ACSIL) के अलावा अन्य निर्माताओं द्वारा उत्पादित देशी शराब पर भी बड़ा बदलाव किया गया है। इस पर शुल्क 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि ACSIL द्वारा निर्मित शराब पर शुल्क यथावत रखा गया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आबकारी शुल्क पर 0.5 प्रतिशत का ‘नशामुक्ति उपकर’ (Health Cess) भी लगाया है। इस राशि का उपयोग राज्यभर में नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना और संचालन के लिए किया जाएगा।
नई नीति के तहत शराब के खुदरा और उत्पादन ढांचे के विस्तार पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। अगले तीन वर्षों तक राज्य में नई देशी शराब दुकानों या निर्माण इकाइयों की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में नई शराब दुकानों के खोलने पर रोक लगा दी गई है।
हालांकि औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित तीन सितारा और उससे ऊपर के होटल एवं क्लबों को कुछ छूट दी गई है। श्री जगन्नाथ मंदिर और पुरी के ग्रैंड रोड (बड़दांड) जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों के आसपास शराब की दुकानें खोलने पर प्रतिबंध रहेगा। इन क्षेत्रों में शराब की होम डिलीवरी भी अनुमति नहीं होगी।
अन्य बदलावों के तहत आबकारी लाइसेंस के आवेदन शुल्क में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जबकि वार्षिक लाइसेंस शुल्क 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा।
संरचनात्मक सुधार के रूप में सरकार ने मौजूदा मिनिमम गारंटीड क्वांटिटी (MGQ) प्रणाली को हटाकर मिनिमम गारंटीड एक्साइज ड्यूटी रेवेन्यू (MGER) मॉडल लागू किया है। इसका उद्देश्य स्थिर राजस्व सुनिश्चित करना और व्यापारियों पर भारी छूट देकर बिक्री बढ़ाने का दबाव कम करना है।
नियमन और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ प्रणाली लागू की जाएगी, जिसके तहत एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) की आवाजाही और उत्पादन से खुदरा बिक्री तक शराब की निगरानी की जाएगी। सभी निर्माण इकाइयों और खुदरा दुकानों को सीसीटीवी निगरानी के दायरे में लाया जाएगा, जिसकी लाइव फीड आबकारी आयुक्त कार्यालय और जिला प्रशासन को उपलब्ध रहेगी।
इसके अलावा आउट-स्टिल (OS) इकाइयों को संचालन का आधुनिकीकरण करने, पैकेजिंग मानकों में सुधार और बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि संशोधित नीति का उद्देश्य राजस्व वृद्धि और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाते हुए शराब कारोबार पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करना है।