26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर ओडिशा की कला और संस्कृति अपनी भव्य उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ओडिशा की झांकी इस वर्ष “विकसित भारत, विकसित ओडिशा” विषय पर आधारित होगी। इसमें राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें विश्वप्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर, उसकी बारीक शिल्पकला, पारंपरिक चित्रकला तथा प्रसिद्ध चांदी की तारकसी (सिल्वर फिलिग्री) कला शामिल हैं।
झांकी में ओडिशा के लोकप्रिय लोकनृत्य चैती घोड़ा नाच की जीवंत प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही कारीगरों द्वारा पत्थर की नक्काशी, पिपिली एप्लिक (कढ़ाई) कला तथा सबई घास से बनी टोकरियों की बुनाई का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
झांकी में विकसित भारत का प्रतीक एक रथ भी शामिल होगा, जिसके साथ ऊर्जावान चैती घोड़ा नाच प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, ऑपरेशन सिंदूर—पाकिस्तान की आक्रामकता के प्रति भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया—को भी झांकी में दर्शाया जाएगा, जो भारत की सैन्य शक्ति और सामर्थ्य को उजागर करेगा।
77वें गणतंत्र दिवस परेड में विशिष्ट अतिथियों के रूप में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को भी सम्मानित किया जाएगा।