राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को जाजपुर जिले के बिरजा मंदिर में पारंपरिक ‘पिंड दान’ अनुष्ठान किया। यह पवित्र स्थल पितृ कर्मों से जुड़े तीन ‘गया क्षेत्र’ में से एक माना जाता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कुंड ‘नविगया’ में यह अनुष्ठान किया और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति एवं मोक्ष के लिए प्रार्थना की। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिसमें मंदिर परिसर और आसपास करीब 600 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया।
हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जाजपुर का विशेष धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि भगवान विष्णु द्वारा वध किए जाने के बाद दानव गयासुर का नाभि भाग यहीं गिरा था। इसके अन्य दो भाग बिहार के गया और आंध्र प्रदेश के पीठापुरम में गिरे थे। इसी कारण जाजपुर को ‘पिंड दान’ के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है।
पितृ अनुष्ठान से पहले राष्ट्रपति ने 13वीं शताब्दी के बिरजा मंदिर में पूजा-अर्चना की, जहां देवी बिरजा की पूजा ‘द्विभुजा’ दुर्गा के रूप में की जाती है-जिन्हें एक हाथ से महिषासुर का वध करते और दूसरे हाथ से उसकी पूंछ पकड़ते हुए दर्शाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनज़र जाजपुर नगर और आसपास के क्षेत्रों के सभी स्कूलों को दिनभर के लिए बंद रखा गया।
दिन के बाद के कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू के बालेश्वर स्थित फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने का कार्यक्रम है।