लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भुवनेश्वर में आयोजित अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समितियों के अध्यक्षों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। ओडिशा में 25 वर्षों के बाद और दिल्ली से बाहर पहली बार आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य अनुसूचित जाति/जनजाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करना था।
सम्मेलन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के विकास का रोडमैप भुवनेश्वर से शुरू होगा। उन्होंने इन समुदायों की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के उचित कार्यान्वयन के महत्व पर बल दिया। बिरला ने अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण के लिए आवंटित बजट का शत-प्रतिशत व्यय करने और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए प्रौद्योगिकी और सुशासन को अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
सम्मेलन में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष डॉ. फगन सिंह कुलस्ते ने सभी से इन समुदायों तक सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।
इस सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित किए गए जो संसद और राज्य विधानसभाओं के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याणकारी उपायों में तेजी लाने हेतु मार्गदर्शक का काम करेंगे। बिरला ने आशा व्यक्त की है कि सम्मेलन के परिणाम कल्याणकारी कार्यक्रमों के सफल कार्यान्वयन हेतु अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं और विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेंगे।