बिहार की राजनीति में आज एक नए युग की शुरुआत होने वाली है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के अनुसार, बिहार में पार्टी के "पहले मुख्यमंत्री" के नाम की घोषणा आज मंगलवार को की जाएगी। इसकी पूरी संभावना है। इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बीच, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उनकी मौजूदगी में विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार से आज मंगलवार सुबह 11 बजे, आखिरी कैबिनेट बैठक के बाद, राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार ने मुख्यमंत्री आवास '1, अणे मार्ग' से अपना सामान भी हटाना शुरू कर दिया है। BJP में मुख्यमंत्री पद के लिए 'कई नामों' पर चर्चा चल रही है। इस दौड़ में मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। सम्राट चौधरी के अलावा, जो दस साल से भी कम समय पहले भाजपा में शामिल हुए थे, अन्य संभावित नेताओं में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और राज्य मंत्री लखेंद्र पासवान और श्रेयसी सिंह के नाम शामिल हैं।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, ये सभी नेता अलग-अलग मायनों में इस पद के लिए उपयुक्त हैं। चौधरी 'कोइरी' जाति से हैं, और उनकी पदोन्नति से यह सुनिश्चित हो सकता है कि कुमार द्वारा अपने 20 साल के शासनकाल में पोषित 'लव कुश' (कुर्मी कोइरी) समीकरण जदयू प्रमुख के जाने के बाद भी राजग के पक्ष में बरकरार रहे। राय संख्या के लिहाज से बिहार की सबसे बड़ी जाति 'यादव' समुदाय से है और उनको आगे बढ़ाने से पार्टी का जनाधार बढ़ सकता है। यादव दशकों से लालू प्रसाद के राजद के साथ रहा है जो राज्य में भाजपा का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी दल है।
इसके साथ ही, इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। ऐसी अटकलें हैं कि शपथ ग्रहण समारोह 14 अप्रैल को हो सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं। बिहार की 243-सदस्यीय विधानसभा में NDA के पास 202 सीटों का भारी बहुमत है, जिसमें BJP की 89 और JDU की 85 सीटें शामिल हैं।