भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) के प्रबंधन वाले सार्वजनिक शौचालयों के उपयोग के लिए शहरवासियों को जल्द ही शुल्क देना पड़ सकता है। वर्तमान में मुफ्त उपलब्ध इस सुविधा पर अब प्रति व्यक्ति पांच रुपये यूजर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, सार्वजनिक यूरिनल (मूत्रालय) का उपयोग पहले की तरह निःशुल्क रहेगा।
सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय ओडिशा के आवास एवं शहरी विकास (H&UD) विभाग के हालिया निर्देश के बाद लिया गया है। विभाग ने सभी शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाओं के संचालन और रखरखाव के लिए यूजर शुल्क प्रणाली लागू करने को कहा है।
विभाग के निर्देश के बाद बीएमसी ने अपने सभी मुफ्त सार्वजनिक शौचालयों को सशुल्क करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
प्रस्ताव के अनुसार, केवल शौचालय का उपयोग करने वालों से पांच रुपये लिए जाएंगे, जबकि सार्वजनिक मूत्रालय का इस्तेमाल पूरी तरह मुफ्त रहेगा, ताकि लोगों को बुनियादी स्वच्छता सुविधा बिना किसी आर्थिक बोझ के उपलब्ध होती रहे।
बीएमसी की मेयर सुलोचना दास ने कहा कि इस प्रस्ताव को निगम की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद नई शुल्क व्यवस्था जल्द लागू कर दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस शुल्क से सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई, रखरखाव और संचालन में सुधार होगा तथा सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर की जा सकेगी।
मेयर ने कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल और कर्नाटक तक देखें तो लगभग हर जगह सार्वजनिक शौचालय के उपयोग के लिए शुल्क देना पड़ता है। पर्यटन स्थलों पर तो 10 रुपये से भी अधिक शुल्क लिया जाता है। लेकिन हमने यहां इसे पूरी तरह मुफ्त रखा था। सरकार की नीति के तहत 10 रुपये तक शुल्क लिया जा सकता है, लेकिन हम पहले चरण में केवल पांच रुपये ही वसूलेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि यदि लोगों को इससे कोई परेशानी होती है तो बीएमसी इस व्यवस्था पर पुनर्विचार कर सकता है। पहले भी कई जगह शुल्क वसूला जाता था, लेकिन वह राशि निगम तक नहीं पहुंचती थी और बीच में गड़बड़ी हो जाती थी। जब लोग शुल्क देते हैं तो उनमें सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी और अपनापन भी बढ़ता है।
आवास एवं शहरी विकास विभाग ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान मुद्रा के आदान-प्रदान से संक्रमण रोकने और लोगों को निर्बाध स्वच्छता सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यूजर शुल्क की वसूली अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थी।
विभाग के अनुसार, यूजर शुल्क से होने वाली आय का उपयोग सार्वजनिक शौचालयों के वित्तीय रूप से टिकाऊ संचालन, बेहतर साफ-सफाई, नियमित रखरखाव और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में किया जाएगा।