मंदिर प्रशासन को सुव्यवस्थित करने और सेवा वितरण में सुधार के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने मंगलवार को एंडोमेंट्स (न्यास) विभाग के अधिकारियों के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम कानून, निर्माण एवं आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन द्वारा भुवनेश्वर के यूनिट-2 स्थित ओडिशा सचिवालय प्रशिक्षण संस्थान (ओएसटीआई) परिसर में उद्घाटित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों को मंदिर सेवाओं के प्रबंधन, मंदिर संपत्तियों के संरक्षण तथा लेखा-जोखा को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से लैस करना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री हरिचंदन ने कहा कि “प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्मचारियों को उनके दायित्वों की गहरी समझ प्रदान करते हैं, जिससे वे अपने कार्य अधिक प्रभावी ढंग से कर पाते हैं। जमीनी स्तर पर सक्षम अधिकारी मंदिर प्रशासन से जुड़े कई मुद्दों का समाधान कर सकते हैं, जिससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित होती है।
उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को अपने दैनिक कार्यों में लागू करें, ताकि राज्यभर में मंदिर प्रशासन को मजबूत किया जा सके।
इस कार्यक्रम में डिजिटल पहलों को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इनमें जन शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए प्रस्तावित ऑनलाइन शिकायत बॉक्स की स्थापना शामिल है। इसके अलावा, विभाग ने अपने आधिकारिक वेबसाइट पर अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी प्राचीन मंदिरों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है, जिससे शोधकर्ताओं, पर्यटकों और आम जनता को इन ऐतिहासिक स्थलों के बारे में जानकारी मिल सके।
कार्यक्रम में उपस्थित सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए. सूर्यनारायण नायडू ने अधिकारियों को न्यास से संबंधित कानूनों और कार्यप्रणालियों की गहन जानकारी प्राप्त करने तथा उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने की सलाह दी। कानून विभाग के प्रधान सचिव डॉ. पवित्र मोहन समल ने अधिकारियों से धैर्य, निष्ठा और नवाचार की भावना के साथ सरकारी दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एंडोमेंट्स आयुक्त ललतेंदु जेना ने स्वागत भाषण दिया, जबकि उप आयुक्त दिलीप कुमार सतपथी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में कानून विभाग के अतिरिक्त सचिव शिव प्रसाद महापात्र, ओएसटीआई निदेशक मनोज कुमार षड़ंगी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस तरह की पहलों के माध्यम से ओडिशा सरकार का लक्ष्य है कि मंदिर प्रशासन पारदर्शी, जवाबदेह और श्रद्धालुओं, शोधकर्ताओं तथा पर्यटकों के लिए सुलभ बना रहे।