साइबर माध्यम से होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से ओडिशा पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुरानिया ने बुधवार को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों के लिए ई-जीरो एफआईआर प्रणाली का शुभारंभ किया।
यह तकनीक आधारित प्रणाली साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों के पंजीकरण और उन पर त्वरित पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित कर मामलों के निपटारे में अधिक दक्षता, पारदर्शिता और गति लाने में मदद करेगी। ऐसे समय में इस प्रणाली की शुरुआत की गई है, जब देशभर में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB) ने पात्र साइबर वित्तीय धोखाधड़ी शिकायतों के लिए अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) की परवाह किए बिना स्वतः ई-जीरो एफआईआर अनुरोध तैयार करने की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 को ओडिशा के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) से एकीकृत किया है।
नई व्यवस्था के तहत, 10 लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतें, यदि राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से दर्ज की जाती हैं, तो उनके लिए CCTNS में स्वतः ई-जीरो एफआईआर अनुरोध तैयार होगा। इसके बाद यह अनुरोध आवश्यक कार्रवाई के लिए साइबर पुलिस स्टेशन, क्राइम ब्रांच, ओडिशा को भेजा जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक शिकायत के तथ्यों और गुण-दोष की जांच के बाद साइबर पुलिस स्टेशन नियमित एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर सकता है, शिकायत को संबंधित साइबर पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित कर सकता है, जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज कर उसे संबंधित क्षेत्राधिकार वाले साइबर अपराध पुलिस स्टेशन को भेज सकता है, शिकायत को पहले से दर्ज किसी एफआईआर से जोड़ सकता है, अथवा निर्धारित मानदंडों पर खरी न उतरने की स्थिति में अनुरोध को बंद कर सकता है।
इस प्रणाली के एकीकरण से एक ही जानकारी को बार-बार दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त होगी, एफआईआर पंजीकरण प्रक्रिया में तेजी आएगी, विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की प्रगति को अधिक प्रभावी ढंग से ट्रैक कर सकेंगे।
प्रणाली के शुभारंभ के अवसर पर डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने कहा कि ओडिशा पुलिस साइबर अपराध से निपटने की व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग के प्रति प्रतिबद्ध है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की किसी भी घटना की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर दें। उन्होंने कहा कि समय पर शिकायत दर्ज कराने से आगे होने वाले नुकसान को रोकने और ठगी गई राशि की वसूली की संभावना काफी बढ़ जाती है।
डीजीपी ने राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB), क्राइम ब्रांच तथा इस प्रणाली के सफल क्रियान्वयन में योगदान देने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई भी दी।
ई-जीरो एफआईआर प्रणाली की शुरुआत ओडिशा पुलिस द्वारा तकनीक आधारित पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य उभरती साइबर अपराध चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना और नागरिकों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराना है।