जय जगन्नाथ के जयघोष और अपार श्रद्धा के बीच गुरुवार शाम करीब पांच बजे पुरी में विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा के तहत रथ खींचने की शुरुआत हुई। निर्धारित समय से लगभग एक घंटे की देरी से शुरू हुई इस परंपरा के साथ महाप्रभु की पावन यात्रा का शुभारंभ हुआ। मूसलाधार बारिश भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। बड़दांड (ग्रैंड रोड) पर लाखों श्रद्धालु छाते लेकर डटे रहे। लगातार बारिश के बावजूद पूरा वातावरण 'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के जयघोष से गूंजता रहा और भक्त भक्ति भाव में झूमते नजर आए।
रथ खींचने से पहले भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक गजपति महाराजा दिव्य सिंह देव ने सोने की झाड़ू से रथों की पारंपरिक छेरा पहंरा रस्म निभाई। इसके बाद सबसे पहले भगवान बलभद्र के तालध्वज रथ को श्रद्धालुओं ने खींचना शुरू किया। हजारों भक्तों ने मिलकर रथ को बड़दांड पर आगे बढ़ाया।
इससे पहले दिन में पहंडी बिजे अनुष्ठान निर्धारित समय से पहले शुरू हुआ था। महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा सहित अन्य देव विग्रहों को 12वीं शताब्दी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से भव्य शोभायात्रा के माध्यम से उनके-अपने सुसज्जित रथों तक लाया गया।
इस दौरान घंटा, काहली और तेलिंगी बाजा की मधुर ध्वनियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार किया, जबकि ओडिसी कलाकारों ने देवताओं के नौ दिवसीय गुंडिचा मंदिर प्रवास के स्वागत में मनमोहक प्रस्तुति दी।
हालांकि, पहंडी अनुष्ठान पूरा होने में दो घंटे से अधिक की देरी हुई। पहंडी के बाद पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अपने शिष्यों के साथ रथों पर विराजमान तीनों देवताओं की पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात गजपति महाराज दिव्य सिंह देव ने देव विग्रहों की पूजा कर छेरा पहंरा अनुष्ठान संपन्न किया।
तालध्वज रथ के बाद देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ और फिर महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के नंदीघोष रथ को खींचा जाएगा।
देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पुरी को भक्ति और उत्सव के अद्भुत रंग में रंग दिया।