विश्वप्रसिद्ध भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ गुरुवार को पवित्र पहंडी बिजे अनुष्ठान के साथ पुरी में हुआ। श्रद्धा और भक्ति के अपार उत्साह के बीच महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को श्रीमंदिर से भव्य शोभायात्रा के रूप में बाहर लाकर उनके-अपने रथों पर विराजमान कराया गया। 12वीं शताब्दी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से देवताओं की पहंडी निर्धारित समय से कुछ पहले शुरू हुई। इस दौरान घंटा और काहली जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार सबसे पहले चक्रराज सुदर्शन को बाहर लाकर देवी सुभद्रा के रथ पर स्थापित किया गया। इसके बाद भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पहंडी हुई, जबकि महाप्रभु श्रीजगन्नाथ को पारंपरिक धाड़ी पहंडी शैली में सबसे अंत में बाहर लाया गया।
पहंडी बिजे अनुष्ठान पूरा होने के बाद पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती अपने शिष्यों के साथ रथों पर विराजमान देवताओं की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक गजपति महाराज दिव्य सिंह देव रथों पर विराजमान देवताओं की पूजा करेंगे और स्वर्ण झाड़ू से रथों की सफाई करने की पारंपरिक छेरा पहंरा रस्म निभाएंगे।
गजपति महाराजा की सेवा के बाद श्रद्धालु तीनों रथों को खींचते हुए लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित श्रीगुंडिचा मंदिर की ओर ले जाएंगे, जिसे भगवान जगन्नाथ का जन्मस्थल माना जाता है।
रथ यात्रा में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं। जैसे ही देव विग्रह आगे बढ़े, पूरा वातावरण 'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति भाव से नृत्य करते हुए महाप्रभु का स्वागत करते नजर आए।
पहंडी अनुष्ठान पूरा होने के बाद महाप्रभु श्रीजगन्नाथ को नंदीघोष रथ, भगवान बलभद्र को तलध्वज रथ और देवी सुभद्रा को दर्पदलन रथ पर विराजमान कराया गया। अब तीनों देवता श्रीगुंडिचा मंदिर की पवित्र यात्रा पर निकलने के लिए तैयार हैं, जहां हजारों श्रद्धालु बड़दांडा (ग्रैंड रोड) पर उनके रथों को खींचकर अपनी आस्था प्रकट करेंगे।